उदयपुर : पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स), उमरड़ा के पीडियाट्रिक सर्जरी (बच्चों की सर्जरी) विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता साबित की है। यहाँ के डॉक्टरों ने मात्र 1.8 किलोग्राम वजन वाले एक समय से पूर्व जन्मे (प्रीमैच्योर) नवजात बच्चे की ‘खाने की नली’ का अत्यंत जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर उसे एक नया जीवन दिया है।

क्या थी गंभीर बीमारी?
जगत (उदयपुर) निवासी एक परिवार के यहाँ इस शिशु का जन्म पिम्स अस्पताल में ही हुआ था। जन्म के तुरंत बाद ही पता चला कि बच्चे की खाने की नली (इसोफेगस) पूरी तरह विकसित नहीं है और वह श्वास नली से जुड़ी हुई है। चिकित्सा विज्ञान में इस दुर्लभ जन्मजात बीमारी को ‘ट्रेकियो इसोफेजियल फिस्टूला’ कहा जाता है, जो लगभग 3000 से 4000 नवजात बच्चों में से किसी एक को होती है।
3 घंटे चला बेहद जटिल ऑपरेशन :
पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अतुल मिश्रा ने बताया कि बच्चे का वजन बेहद कम (1.8 किलो ) और समय से पहले पैदा होना इस सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद, लगभग 3 घंटे तक चले बेहद बारीक ऑपरेशन के बाद बच्चे की खाने की नली को श्वास नली से अलग किया गया और उसे सही तरीके से आपस में जोड़ा गया। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) दे दी गई है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि पिम्स अस्पताल में ऐसे ऑपरेशन नियमित रूप से होते रहते हैं, लेकिन इस केस की जटिलताओं को देखते हुए यह सफलता पूरी टीम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
इन्होंने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका :
इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन और इलाज में पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. विवेक पाराशर, डॉ. राहुल खत्री के साथ-साथ निश्चेतन (एनेस्थीसिया) विभाग की डॉ. पिनू, डॉ. साक्षी, डॉ. कमलेश कंवर और नर्सिंग स्टाफ में रेशमा, अरुण, अशोक, राहुल, शिव व दीपक ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जननी सुरक्षा योजना’ के तहत हुआ निःशुल्क इलाज :
पिम्स के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने इस बड़ी सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ‘जननी सुरक्षा योजना’ के अंतर्गत इस बच्चे का पूरा इलाज बिल्कुल निःशुल्क किया गया है। श्री अग्रवाल ने यह भी दोहराया कि पिम्स अस्पताल उमरड़ा सभी आधुनिक और नवीनतम चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित है और उदयपुर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहा है।
