भारत की जनगणना – 2027 : डिजिटल होगी जनगणना, नागरिक घर बैठे स्व-गणना से दर्ज कर सकेंगे विवरण

उदयपुर। भारत की आगामी जनगणना 2027 को अधिक सटीक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए इस बार डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। उदयपुर जिला कलक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्री गौरव अग्रवाल ने जिले के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी कर जनगणना के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं।
1 मई से शुरू होगा प्रथम चरण :
राजस्थान में जनगणना 2027 का प्रथम चरण 1 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इसमें दो मुख्य प्रक्रियाएं शामिल होंगी। स्व-गणना 1 मई से 15 मई 2026 तक तक होगी। वहीं फील्ड कार्य (प्रगणकों द्वारा) 16 मई से 14 जून 2026 तक किया जाएगा।
घर बैठे करें स्व-गणना, समय की होगी बचत :
सरकार ने इस बार आम नागरिकों के लिए स्व-गणना का विकल्प पेश किया है। नागरिक 1 मई से 15 मई के बीच समर्पित वेब पोर्टल (सेन्सेस डॉट जीओवी डॉट इन) के माध्यम से अपने परिवार का विवरण खुद दर्ज कर सकते हैं। इसकी प्रक्रिया काफी सरल है, परिवार का मुखिया मात्र 15-20 मिनट में यह प्रक्रिया पूरी कर सकता है। पोर्टल हिंदी, अंग्रेजी और 14 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। स्व-गणना पूरी होने पर मोबाइल या ईमेल पर एक स्व-गणना पहचान संख्या प्राप्त होगी। जब प्रगणक घर आएंगे, तो उन्हें केवल यह आईडी दिखानी होगी, जिससे डेटा सत्यापन तुरंत हो जाएगा।
सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को स्वगणना के निर्देश :
जिला कलक्टर ने जिले के समस्त सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सबसे पहले अपने परिवारों की स्व-गणना सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों की यह पहल आम जनता के लिए एक उदाहरण पेश करेगी और राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में जन-सहभागिता को बढ़ावा देगी। जिला जनगणना अधिकारी एडीएम प्रशासन दीपेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि जिला/ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एवं कार्मिकों द्वारा 1 मई 2026 को स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की जाएगी। साथ ही स्वगणना के लिए ब्लॉक स्तर एवं विभिन्न प्रमुख स्थलों पर विशेष कैम्पों का आयोजन किया जाएंगा।
भारत की जनगणना, राष्ट्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से देश के प्रत्येक नागरिक से संबंधित सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्रित की जाती है। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र एवं राज्य सरकारें विभिन्न विकास योजनाओं, आधारभूत सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की योजना बनाती हैं।

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