हिंदुस्तान जिंक द्वारा राजस्थान में 250-हेक्टेयर के इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट के लिए टीईआरआई के साथ एमओयू

औद्योगिक जमीन को प्राकृतिक इकोसिस्टम में बदलने की बड़े पैमाने की पहल, जिससे बायोडायवर्सिटी और क्लाइमेट रेजिलिएंस को मिलेगा बढ़ावा
यह प्रोजेक्ट हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर कॉम्प्लेक्स में विकसित किया जाएगा। टीईआरई की माइकोराइजा टेक्नोलॉजी से 22.25 हेक्टेयर औद्योगिक बंजर जमीन को पहले ही सफलतापूर्वक रेस्टोर किया जा चुका है
उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक और शीर्ष 10 सिल्वर उत्पादक कंपनियों में से एक, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने राजस्थान में 250-हेक्टेयर के इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट को विकसित करने के लिए द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के साथ एमओयू साइन किया। इस प्रोजेक्ट से औद्योगिक परिसर में विश्व का सबसे बड़ा ग्रीन कवर एरिया विकसित होगा। चित्तौड़गढ़ जिले में हिंदुस्तान जिंक के चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में शुरू होने वाली यह पहल, औद्योगिक क्षेत्र को प्राकृतिक इकोसिस्टम के रूप में बदलने की कंपनी के प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम है।
यह सहयोग हिंदुस्तान जिंक के सस्टेनेबिलिटी गोल 2030 को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका मकसद मापने योग्य सुधारों के जरिए बायोडायवर्सिटी के नुकसान को रोकना और उसे बदलना है, साथ ही लंबे समय में नेट पॉजिटिव इम्पैक्ट और प्रकृति-सकारात्मक नतीजों को सपोर्ट करने की दिशा में लगातार काम करना है।
यह प्रोजेक्ट एक वैज्ञानिक, मल्टी-लेयर्ड इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन अप्रोच को अपनाएगा, जिसमें स्थानीय इलाके के अनुकूल पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ और घास शामिल होंगे। इसमें बाहरी प्रजातियों के मैनेजमेंट, जल निकायों और जलीय इकोसिस्टम को सपोर्ट करने और लंबे समय तक रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित करने के उपाय भी शामिल होंगे। टीईआरई उपयुक्त स्थानीय और अनुकूलनशील पौधों की प्रजातियों की पहचान करने में भी मदद करेगा और प्लानिंग, डिजाइन और इम्प्लीमेंटेशन के चरणों में विषय-विशेषज्ञों को शामिल करेगा।
यह नया सहयोग चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स में टीआरआई के साथ हिंदुस्तान जिंक के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और आगे बढ़ाता है। जारोफिक्स यार्ड में, दो चरणों में 22.25 हेक्टेयर क्षेत्र में रेस्टोरेशन का काम पहले ही पूरा हो चुका है। इससे औद्योगिक जमीन को इकोलॉजिकल रूप से काम करने वाले और बायोडायवर्सिटी से पूरी तरह ग्रीन कवर में बदल दिया गया है। इसके साथ ही, कॉम्प्लेक्स में सुरक्षित लैंडफिल के ऊपर 6 हेक्टेयर का बायोडायवर्सिटी पार्क बनाया जा रहा है। टीईआरआई की माइकोराइजा टेक्नोलॉजी के उपयोग से इस पहल के तहत लगभग 56,400 स्थानीय पेड़ लगाए गए हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र घनी हरियाली तैयार हुई है।
इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक में, हमारे कामकाज के तरीके में सस्टेनेबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण है। पानी के सही प्रबंधन और सर्कुलरिटी से लेकर डीकार्बोनाइजेशन और बायोडायवर्सिटी के संरक्षण तक, हमारा ध्यान जिम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार कामकाज बनाने पर है। टीईआरआई के साथ हमारी साझेदारी इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, हम औद्योगिक जमीन को ऐसे मजबूत ग्रीन इकोसिस्टम में बदल रहे हैं जो स्थानीय बायोडायवर्सिटी और इकोलॉजिकल बहाली में मदद करते हैं। आईसीएमएम में शामिल होने वाली पहली भारतीय कंपनी के तौर पर, हम सस्टेनेबल माइनिंग में ग्लोबल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठा रहे हैं और पर्यावरण, समुदायों और देश के लिए लंबे समय तक चलने वाला मूल्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह पहल हिंदुस्तान जिंक के व्यापक एनवायरनमेंट, सोशल और गवर्नेंस रोडमैप के अनुरूप है, जो जमीन की बहाली, बायोडायवर्सिटी संरक्षण, पानी के सही प्रबंधन, डीकार्बोनाइजेशन और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन पर बल देता है। कंपनी 530 मेगावाॅट के चैबीसों घंटे चलने वाले रिन्यूएबल एनर्जी एग्रीमेंट के जरिए अपनी सस्टेनेबिलिटी परफॉर्मेंस को मजबूत कर रही है। इससे उसकी 70 प्रतिशत से अधिक बिजली की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद है और शुरुआती सप्लाई पहले ही शुरू हो चुकी है। इसने अपने पानी के रीसाइक्लिंग रेट को भी 49 प्रतिशत तक बेहतर किया है और अपने ग्रीन मोबिलिटी फ्लीट को बढ़ाकर 232 वाहन कर लिया है, जिसमें इलेक्ट्रिक और एलएनजी से चलने वाले वाहन शामिल हैं।
वेदांता ग्रुप की कंपनी हिंदुस्तान जिंक को हाल ही में एसएण्डपी ग्लोबल कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट 2025 में लगातार तीसरे वर्ष विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल्स और माइनिंग कंपनी का दर्जा दिया गया। प्रस्तावित 250 हेक्टेयर के इकोलॉजिकल बहाली प्रोजेक्ट के साथ, कंपनी जिम्मेदार औद्योगिक कामकाज रीजेनरेटिव लैंडस्केप, क्लाइमेट रेजिलिएंस और समुदायों, बायोडायवर्सिटी और ग्रह के लिए लंबे समय तक चलने वाला मूल्य बनाने में योगदान को सुनिश्चित कर रही हैं।

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