एआई सक्षम विश्वविद्यालय बनाने का संकल्प लें शिक्षक” — प्रो. मंजू मांडोत

राजस्थान विद्यापीठ में AICTE-अटल अकादमी के छह दिवसीय राष्ट्रीय एफडीपी के दूसरे दिन जनरेटिव एआईप्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग एवं एआई आधारित पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण पर हुआ मंथन

उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड आईटी द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की अटल अकादमी के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) “एआई-प्रधान शिक्षण पद्धति: जनरेटिव एआई एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों द्वारा कंप्यूटर अनुप्रयोगों में परिवर्तन” के दूसरे दिन दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

एफडीपी के प्रथम तकनीकी सत्र में राजस्थान विद्यापीठ की कुलपति प्रो. मंजू मांडोत ने “शिक्षकों के लिए जनरेटिव एआई एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग: शिक्षण दक्षता में वृद्धि” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। प्रो. मंजू मांडोत ने अपने व्याख्यान में जनरेटिव एआई की अवधारणा, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की उपयोगिता तथा शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न आधुनिक एआई टूल्स के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उदाहरणों एवं व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से बताया कि शिक्षक किस प्रकार एआई टूल्स का उपयोग पाठ योजना तैयार करने, अध्ययन सामग्री विकसित करने, विद्यार्थियों के लिए गतिविधियां एवं असाइनमेंट तैयार करने, प्रश्न निर्माण, मूल्यांकन तथा अन्य शैक्षणिक कार्यों में कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनरेटिव एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग शिक्षकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षण प्रक्रिया को अधिक रचनात्मक, प्रभावी, संवादात्मक एवं परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों से आग्रह किया कि वे एआई को केवल एक तकनीकी उपकरण के रूप में न देखते हुए इसे शिक्षण एवं प्रशासनिक कार्यों में सहयोगी तकनीक के रूप में अपनाएं।

प्रो. मांडोत ने कहा कि वर्तमान तकनीकी परिवेश में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एआई सक्षम विश्वविद्यालय की दिशा में आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संकाय सदस्यों को अपने-अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों में एआई के अधिकतम और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केवल तकनीकी संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को एआई आधारित कार्यप्रणाली के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित करना भी आवश्यक है। उन्होंने सभी संकाय सदस्यों से अपने विभाग एवं कार्यक्षेत्र के अनुरूप एआई कार्यान्वयन का रोडमैप तैयार करने तथा चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग मानवीय रचनात्मकता, विशेषज्ञता और निर्णय क्षमता को प्रतिस्थापित करने के बजाय उसे सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए।

प्रथम तकनीकी सत्र के पश्चात प्रतिभागियों के मध्य आर्टिकल डिस्कशन एवं विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया। इसमें एआई, जनरेटिव एआई, शिक्षा में तकनीकी नवाचार तथा उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप से संबंधित शोध आलेखों एवं नवीन विचारों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न शोध निष्कर्षों पर अपने विचार साझा किए तथा शिक्षा व्यवस्था में एआई के व्यावहारिक उपयोग से संबंधित संभावनाओं एवं चुनौतियों पर संवाद किया। इस गतिविधि का उद्देश्य प्रतिभागियों में शोधपरक सोच, आलोचनात्मक विश्लेषण तथा तकनीकी विषयों पर अकादमिक चर्चा को प्रोत्साहित करना रहा। एफडीपी के द्वितीय तकनीकी सत्र में गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष प्रो. हिरेन जोशी ने “बीसीए एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन के लिए एआई आधारित पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। प्रो. जोशी ने अपने व्याख्यान में वर्तमान उद्योग जगत एवं रोजगार बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप बीसीए एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन के पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई एवं अन्य उभरती तकनीकों को पाठ्यक्रम में समुचित रूप से शामिल करके विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी एवं औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए अधिक बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकता है। उन्होंने नवीनतम एआई टूल्स के माध्यम से असाइनमेंट तैयार करने, क्विज निर्माण, शिक्षण सामग्री विकसित करने, विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन करने तथा कौशल आधारित गतिविधियों को डिजाइन करने की विभिन्न तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

प्रो. जोशी ने कहा कि आज के समय में कंप्यूटर एप्लीकेशन के विद्यार्थियों के लिए केवल पारंपरिक प्रोग्रामिंग एवं सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्हें एआई, डेटा, ऑटोमेशन, आधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने पाठ्यक्रम निर्माण में इंडस्ट्री-अकादमिक समन्वय, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया। दोनों तकनीकी सत्रों के उपरांत प्रतिभागियों के लिए हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस सेशन आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों द्वारा बताए गए विभिन्न एआई टूल्स एवं तकनीकों का स्वयं प्रयोग किया और उनके शैक्षणिक उपयोग की प्रक्रिया को समझा। व्यावहारिक सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने एआई की सहायता से शिक्षण सामग्री तैयार करने, प्रॉम्प्ट तैयार करने, असाइनमेंट एवं क्विज विकसित करने तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने का अभ्यास किया। प्रतिभागियों ने इस व्यावहारिक सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं एवं तकनीकी प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों एवं अतिथियों का स्वागत डॉ. गौरव गर्ग द्वारा किया गया। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ताओं का स्वागत करते हुए एफडीपी के उद्देश्यों एवं उच्च शिक्षा में एआई के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भरत सुखवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी विशेषज्ञों, अतिथियों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में एफडीपी के समन्वयक डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी, सह-समन्वयक डॉ. दिलीप चौधरी सहित डॉ. प्रदीप सिंह शक्तावत, डॉ. राजन सूद, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. हेमंत साहू, डॉ. नरदेव सिंह, डॉ. पल्लव पांडे, डॉ. प्रेरणा भाटी, डॉ. दीपक दशोरा, डॉ. पंकज श्रीमाली, डॉ. ललित सालवी, डॉ. विकास डांगी, डॉ. शीना वाहिद, मुकेश नाथ, दुर्गा शंकर, मनोज यादव, त्रिभुवन सिंह एवं चिराग दवे सहित विभिन्न संस्थानों से आए संकाय सदस्य एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। छह दिवसीय यह राष्ट्रीय एफडीपी उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक एवं जिम्मेदार उपयोग, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, जनरेटिव एआई, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा एआई आधारित पाठ्यक्रम विकास के क्षेत्र में संकाय सदस्यों की क्षमता वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को न केवल एआई की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है, बल्कि उन्हें इन तकनीकों का वास्तविक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों में प्रयोग करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।