ऋषभदेव मंदिर व ईडाणा माता मंदिर को प्रसाद योजना में शामिल करवाने सांसद डॉ रावत ने उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी को पत्र लिखा

पर्यटन विभाग सचिव को भी पत्र भेजकर आग्रह किया
केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी इस पर सहमति दी है

उदयपुर। सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और पर्यटन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर उदयपुर जिले में ऋषभदेव मंदिर एवं सलूंबर जिले में स्थित श्री शक्ति पीठ ईडाणा माता मंदिर को प्रसाद योजना के अंतर्गत विकसित करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है।
सांसद डॉ रावत ने पत्र में बताया कि इस सम्बन्ध में केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ विगत दिनों सार्थक चर्चा हुई है, जिसमें उक्त दोनों स्थलों को प्रसाद योजना में शामिल करने पर सहमति प्राप्त हुई है। अब इस प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को मिजवाया जाना है। सांसद डॉ रावत ने बताया कि उनकी लोकसना क्षेत्र में स्थित ऋषभदेव मंदिर एवं श्री शक्ति पीठ ईडाणा माता मंदिर मेवाड़ अंचल के अत्यंत प्राचीन, प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक तीर्थ स्थल हैं। इन दोनों स्थलों पर प्रतिवर्ष देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु एवं पर्यटक दर्शन के लिए आते हैं। ऋषभदेव मंदिर (केसरियाजी) भगवान ऋषभदेव, प्रथम जैन तीर्थकर, को समर्पित एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां जैन एवं हिन्दू समुदाय के श्रद्धालु समान श्रद्धा एवं आस्था के साथ दर्शन करते हैं। परिसर में भगवान विष्णु (धारनुजा जी), भगवान शिव (सोमनाथ) एवं मरूदेवी माता के मंदिर भी स्थित हैं। लगभग 800 वर्ष पुराना ऐतिहासिक रथ यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत है तथा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला रथोत्सव इसका प्रमुख आकर्षण है। इस स्थल के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए यात्री सुविधाओं, आधारभूत पर्यटन अवसंरचना, सौंदर्गीकरण एवं विरासत संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक विकास की आवश्यकता है।
इसी प्रकार श्री शक्ति पीठ ईडाणा माता मंदिर मर्मों ईडाणा (आदिशक्ति) को समर्पित मेवाड़ अंचल का प्रमुख शक्तिपीठ है। नवरात्रि एवं अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशाल मेलों एवं धार्मिक आयोजनों का आयोजन होता है। मंदिर की धार्मिक आस्था, प्राकृतिक परिवेश एवं सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए यहां यात्री सुविधाओं, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, आवागमन, प्रतीक्षालय, धर्मशाला, प्रकाश व्यवस्था, सूचना केन्द्र, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक पर्यटन अवसंरचना के विकास की आवश्यकता है। दोनों तीर्थ स्थलों का समग्र एवं सुव्यवस्थित विकास होने से न केवल श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्राप्त होंगी, बल्कि सम्पूर्ण दक्षिणी राजस्थान में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प, लघु व्यवसाय एवं क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
सांसद डॉ रावत ने दोनों स्थलों को प्रसाद योजना के अंतर्गत विकसित किए जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजने का आग्रह किया है।