उदयपुर : पिम्स सिटी हॉस्पिटल और पिम्स हॉस्पिटल, उमरड़ा ने मिलकर चिकित्सा उत्कृष्टता और बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) तालमेल का बेजोड़ उदाहरण पेश करते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम ने गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित एक अत्यंत उच्च जोखिम वाले (हाई-रिस्क) गर्भावस्था के मामले को सफलतापूर्वक संभाला है। टीम ने माँ और नवजात शिशु दोनों को सुरक्षित व स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दिला दी है।
यह जटिल मामला एक पूर्ण-अवधि (फुल-टर्म) गर्भवती मरीज का था, जो क्रोनिक लिवर डिजीज (लिवर की पुरानी बीमारी), हाइपरस्प्लेनिज्म, पोर्टल हाइपरटेंशन और गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (रक्त में प्लेटलेट्स की अत्यधिक कमी) से पीड़ित थीं। मरीज को पिछले तीन से चार वर्षों से बार-बार नाक से खून बहने की समस्या भी थी। अस्पताल में भर्ती होने के समय, उनके ऑपरेशन-पूर्व प्लेटलेट्स की संख्या गंभीर रूप से घटकर 10,000-13,000/µL दर्ज की गई थी, जिस पर सामान्य स्टेरॉयड या IVIg उपचारों का कोई असर नहीं हो रहा था। अल्ट्रासाउंड स्कैन में उनके लिवर में सूजन (फैटी लिवर) के साथ-साथ तिल्ली का आकार बहुत बढ़ा हुआ (स्प्लेनोमेगाली) पाया गया था।
जानलेवा रक्तस्राव (हेमरेज) के भारी जोखिम को देखते हुए, दो चिकित्सा संस्थानों पिम्स सिटी हॉस्पिटल और पिम्स हॉस्पिटल, उमरड़ा ने एक व्यापक और चरणबद्ध चिकित्सा रणनीति तैयार की गई। मरीज को शुरुआत में पिम्स सिटी हॉस्पिटल में डॉ. शब्दिका कुलश्रेष्ठ के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम द्वारा स्थिर (ऑप्टिमाइज) किया गया, जिसमें डॉ. शिखा, डॉ. अजय पाल सिंह, डॉ. अजय अरोड़ा और डॉ. सचिन मोदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ऑपरेशन से पहले के जोखिमों का आकलन और आपातकालीन तैयारियों की बारीक रूपरेखा डॉ. सचिन जैन, डॉ. धवल व्यास, डॉ. के.के. बिश्नोई और डॉ. गणेश गुप्ता द्वारा तैयार की गई थी।
उन्नत ब्लड-बैंक सुविधाओं और सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, मरीज को रणनीतिक रूप से पिम्स उमरड़ा में स्थानांतरित किया गया। उमरड़ा केंद्र पर, डॉ. कमलेश शेखावत, डॉ. रवि, डॉ. अमिता, डॉ. अनिल भीवाल, डॉ. अमित जांगिड़ और डॉ. सुषमा की एक समर्पित क्रिटिकल केयर टीम ने चौबीसों घंटे सातों दिन मरीज की निगरानी की।
शीर्ष स्तरीय ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू बुनियादी ढांचे की मदद से सफल डिलीवरी के बाद, अगली चुनौती नवजात शिशु की देखभाल की थी। नवजात शिशु में भी थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (प्लेटलेट्स की कमी) के लक्षण पाए गए, जिसके लिए उसे तुरंत IVIg इन्फ्यूजन थेरेपी की आवश्यकता थी। डॉ. राहुल, डॉ. गिरीश और डॉ. कपिल के नेतृत्व में एनआईसीयू टीम की विशेषज्ञ देखरेख में शिशु का सफलतापूर्वक इलाज किया गया और उसकी स्थिति में सुधार आया।
इस सफल परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्य विशेषज्ञ डॉ. शब्दिका कुलश्रेष्ठ ने कहा कि इस मामले ने एक बार फिर एकता, टीम वर्क, पूर्व-तैयारी और आपसी विश्वास की ताकत को साबित किया है। हमने एक ऐसी स्थिति को सफलतापूर्वक संभाला जो देश के प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण होती। हमारे अथक रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, फिजियोथेरेपिस्ट और तकनीशियनों सहित पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों ने रंग दिखाया है।
चिकित्सा टीम ने संस्थान के संरक्षकों—आशीष अग्रवाल, श्रीमती शीतल अग्रवाल और नमन अग्रवाल के प्रति भी अपना गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोनों संस्थानों में विश्वस्तरीय और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराकर डॉक्टरों को सशक्त बनाया, जो इन दो जिंदगियों को बचाने में निर्णायक साबित हुआ।
पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद, माँ और नवजात शिशु दोनों को सुरक्षित और स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
चिकित्सा जगत में बड़ी सफलता : दो अस्पतालों की टीम ने मिलकर जटिल प्रसूति मामले में माँ और बच्चे की बचाई जान
