मां की भक्ति, तप, साधना और दृढ़ संकल्प से दूर होता है अहंकार: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवातीर्थ स्थित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम के दूसरे दिन देवी भगवती की महिमा, आदिशक्ति के स्वरूप और विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा में मां भुवनेश्वरी, मां शाकंभरी, मां ब्रह्मचारिणी और मां पार्वती के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, तप, संयम, करुणा और परोपकार का संदेश दिया गया।

कथा में भगवान हयग्रीव, मधु-कैटभ वध और मणिद्वीप में मां भुवनेश्वरी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए आदिशक्ति की महिमा बताई गई। सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार में देवी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा गया कि आदिशक्ति ही समस्त सृष्टि का मूल आधार हैं।

मां शाकंभरी के प्रसंग में अकाल और जल संकट से पीड़ित प्राणियों के प्रति देवी की करुणा का वर्णन किया गया। बताया गया कि देवी ने अपने आंसुओं से जल संकट दूर किया और फल, कंद-मूल तथा शाक-सब्जियों के माध्यम से जीवों का भरण-पोषण किया। इस प्रसंग से प्रेरणा लेते हुए जरूरतमंदों की सहायता और भूखों को भोजन कराने का संदेश दिया गया।

मां ब्रह्मचारिणी और मां पार्वती से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से तप, साधना और दृढ़ संकल्प की महत्ता बताई गई। वहीं, मां पार्वती के विराट स्वरूप और हिमवान को दिए गए उपदेश के जरिए सभी प्राणियों में ईश्वर के दर्शन करने तथा अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा दी गई।

मानव सेवा भी सच्ची भक्ति का स्वरूप
नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि मां की भक्ति, तप, साधना और दृढ़ संकल्प से अहंकार दूर होता है। सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों के दुख को समझने, भूखों को भोजन कराने और जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में भी निहित है। उन्होंने मानव सेवा को आध्यात्मिक जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए दिव्यांगजनों को उपचार, कृत्रिम अंग, शिक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
कथा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देवी भागवत का श्रवण किया और आध्यात्मिक संदेशों का लाभ लिया।