सूर्या गायत्री के सुरों से गूँज उठा गीतांजली विश्वविद्यालय का सभागार
उदयपुर | AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ की रजत जयंती समारोह के अंतर्गत शनिवार को उदयपुर स्थित गीतांजली विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में सुप्रसिद्ध युवा गायिका सूर्या गायत्री द्वारा प्रस्तुत “रामं भजे” वैदिक एवं भक्ति-प्रधान भजन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं गणेश भजन “महागणपतिम्” के साथ की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतांजली ग्रुप के चेयरमैन जे.पी. अग्रवाल ने की। इस अवसर पर बी.आर. अग्रवाल, गीतांजली ग्रुप के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल, Aim for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ से जुड़े संतगण, आचार्यगण, शिक्षाविद् एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
गीतांजली ग्रुप के चेयरमैन जे.पी. अग्रवाल ने कहा कि Aim for Seva एवं आर्ष विद्यातीर्थ द्वारा सुदूर एवं वंचित अंचलों के बच्चों को संस्कारयुक्त सर्वांगीण शिक्षा प्रदान करना अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब उसमें सेवा-भाव जुड़ा हो, और गीतांजली विश्वविद्यालय इसी मूल भावना के साथ कार्य कर रहा है। वेद-पाठ एवं स्तोत्र-पाठ करते बच्चों को देखकर उन्हें गहन आत्मिक प्रसन्नता हुई। उन्होंने इस आयोजन को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों का उत्सव बताया तथा Aim for Seva की 25 वर्षों की सेवा-यात्रा के लिए बापना साहब, पूज्य स्वामीजी तथा सभी अतिथियों को हार्दिक साधुवाद दिया। उन्होंने सूर्या गायत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि राम मंदिर की स्थापना के वक्त प्रधानमंत्री ने भी उनकी भरपूर प्रशंसा की है क्यूंकि उनके ये भजन समाज में परिवर्तन लायेंगे और नयी दिशा देंगे| सोशल मीडिया के ज़माने में इस तरह के कार्यक्रमों का महत्व और बढ़ गया है|
सूर्या गायत्री : एक प्रेरणादायक यात्रा
26 जनवरी 2006 को केरल के कोझिकोड ज़िले के शांत ग्राम परम्मेरी में जन्मीं सूर्या गायत्री ने अल्प आयु में ही भक्ति एवं आध्यात्मिक संगीत के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। उनके पिता पी. वी. अनिल कुमार, कोझिकोड आकाशवाणी के प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जबकि माता श्रीमती पी. के. दिव्या एक संवेदनशील कवयित्री हैं।
सूर्या गायत्री भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा एवं क़तर जैसे देशों में भी अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुकी हैं। उनके संगीत जीवन का एक विशेष क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री द्वारा उनके द्वारा गाए गए “श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन” भजन को सोशल मीडिया पर साझा किया, जो आज भी श्रीराम मंदिर में गूंजता है।
इसके पश्चात सूर्या गायत्री द्वारा प्रस्तुत भजनों ने पूरे सभागार को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। उन्होंने महागणपतिम्, रामं भजे, ठुमक चलत रामचंद्र, राम को देख कर, श्रीरामचंद्र कृपालु, सीतापति संकीर्तन, रघुवर तुमको, मेरे घर राम आए हैं, भारत देश तथा हनुमान चालीसा का अत्यंत भावपूर्ण और शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया।
पिछले 18 वर्षों से दक्षिण राजस्थान में सक्रिय गीतांजली विश्वविद्यालय एवं गीतांजली ग्रुप न केवल उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है, बल्कि शिक्षा, समाजसेवा तथा आध्यात्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण हेतु भी निरंतर कृतसंकल्प है। चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के साथ-साथ इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से गीतांजली विश्वविद्यालय समाज के सभी वर्गों के समग्र विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभाता आ रहा है। यह कार्यक्रम उसी सामाजिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
गीतांजली विश्वविद्यालय का स्पष्ट विज़न है—“उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा एवं अनुसंधान की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करना, आत्मविश्वासी एवं आत्मनिर्भर पेशेवरों का निर्माण करना तथा किफायती एवं उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना।”इसी दृष्टि को केंद्र में रखते हुए विश्वविद्यालय निरंतर सेवा-प्रधान गतिविधियों में सहभागिता करता रहा है, और यह कार्यक्रम उस संकल्प की सार्थक अभिव्यक्ति है।
उदयपुर की पुण्य धरा पर इस प्रकार के शास्त्रीय संगीत एवं वैदिक भाव-भक्ति से परिपूर्ण भजन कार्यक्रम का आयोजन अपने आप में एक अनूठा सांस्कृतिक उत्सव रहा। देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से पधारे संतों एवं आचार्यों की उपस्थिति ने इस संध्या को श्रुति एवं स्मृति परंपरा का सजीव स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर AIM for Seva एवं आर्ष विद्यापीठ के प्रकल्पों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। ये संस्थाएँ दूर-दराज़ के जनजातीय अंचलों से आने वाले बालकों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के साथ-साथ वेदान्तिक ज्ञान एवं संस्कार प्रदान कर रही हैं। यह पहल परम पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती के दूरदर्शी विज़न का सशक्त स्वरूप है। इसी विचार-साम्यता के कारण गीतांजलि विश्वविद्यालय, AIM for Seva एवं आर्ष विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी ब्रह्मपरमानंद ने Aim for Seva एवं आर्ष विद्यापीठ के विभिन्न सेवा प्रकल्पों की जानकारी दी। स्वामीजी ने कहा कि छात्रालयों में केवल देह का पोषण नहीं होता, बल्कि चित्त का शोधन भी होता है। यहाँ विद्या शब्द मात्र न रहकर संस्कार बन जाती है, और विद्यार्थी गीता के श्लोकों के माध्यम से जीवन का अर्थ समझते हुए एक संयमी, सुसंस्कृत एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित होते हैं।
Aim for Seva की चीफ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफिसर सिरनी, जो विशेष रूप से इस कार्यक्रम हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका से पधारे, ने बताया कि संस्था के भारतभर के 17 राज्यों में 91 छात्रावास संचालित हैं, जिनसे प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। छात्रावासों में अध्ययनरत जनजातीय क्षेत्रों से आए बालकों द्वारा शुद्ध उच्चारण एवं आत्मविश्वास के साथ वैदिक मंत्रोच्चार प्रस्तुत किया जाता है, यह दृश्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण था कि सच्चे सेवा-भाव से किसी भी अंचल के बच्चों को संस्कारित एवं सक्षम बनाया जा सकता है। राजस्थान में जयपुर व उदयपुर में छात्रावास हैं और साथ ही उदयपुर में स्कूल की परियोजना क्रियान्वित है| यह भव्य वैदिक-भक्ति संध्या गीतांजली विश्वविद्यालय के सेवा, संस्कृति और समाज के प्रति संकल्प का एक अविस्मरणीय अध्याय बनकर सदैव स्मरणीय रहेगी। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर नीरज गुप्ता द्वारा किया गया|
AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ की रजत जयंती के अंतर्गत गीतांजली विश्वविद्यालय में भव्य वैदिक-भक्ति संध्या का आयोजन
