वल्लभनगर/मेनार । उपखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत रुण्डेड़ा में स्थित प्राचीन गायरिया बावजी मंदिर का जीर्णोद्धार एवं नव निर्माण कार्य अब भव्य रूप लेता नजर आ रहा है। दर्जनभर से अधिक गांवों के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र यह मंदिर भामाशाहों के सहयोग से करीब 55 लाख रुपये की लागत से संगमरमर पत्थरों से निर्मित किया जा रहा है। मंदिर निर्माण के साथ-साथ चारों ओर बाउंड्रीवाल का कार्य भी भामाशाहों के सहयोग से किया जा रहा है। अब तक लगभग 49 लाख रुपये का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य अंतिम चरण में है।
रेन कुमार पालीवाल और भंवरलाल हरजोत ने बताया कि शिखर मंदिर का स्वरूप अब स्पष्ट रूप से उभरने लगा है। अनुमान है कि आगामी तीन माह में निर्माण कार्य पूर्ण हो जाएगा, जिसके बाद ध्वजारोहण एवं कलश स्थापना का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सूरजकुंड, कुम्भलगढ़ के श्रीश्री 1008 श्री अवधेशानंदजी महाराज, महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन उदयपुर के ट्रस्टी डॉ. लक्षराजसिंह मेवाड़, बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, भामाशाह एवं गणमान्य अतिथि शामिल होने की संभावना है। पूर्व उपसरपंच मेनार शंकरलाल मेरावत द्वारा अभिनेत्री जान्हवी कपूर की उपस्थिति के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
योगेश पालीवाल ने बताया कि यह मंदिर गांव की स्थापना के समय से ही क्षेत्रवासियों की श्रद्धा का प्रतीक रहा है। मेनार, बरोडिय़ा, शोपुरा, गारियों की भागल, नाहरपुरा, इंडिया, तीतरड़ा, खेरोदा, फतहनगर सहित अनेक गांवों से श्रद्धालु यहां दर्शन व मन्नत मांगने आते हैं। मान्यता है कि गायरिया बावजी जहर सूखाने वाले देवता हैं और यहां मांगी गई मन्नतें पूर्ण होती हैं। शारदीय नवरात्रि में मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान व हवन आयोजित होते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर अत्यंत प्राचीन होने से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया था, जिस पर सर्वसम्मति से जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया। 25 जनवरी 2024 को गुरु पुष्य नक्षत्र में विधायक उदयलाल डांगी द्वारा मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया गया। ठेकेदार नारायणदास मनोहरपुरा के निर्देशन में पिण्डवाड़ा, सिरोही, भीनमाल व जालौर के कुशल शिल्पकार संगमरमर पर उत्कृष्ट नक्काशी कर मंदिर को भव्य स्वरूप दे रहे हैं। इसमें प्रयुक्त संगमरमर राजसमंद जिले से लाया गया है।
ग्रामीण मोतीलाल भट्ट व अन्य ने बताया कि मंदिर से जुड़ी मवेशियों की भी विशेष आस्था है। मान्यता है कि मंदिर की परिक्रमा कराने से मवेशी रोगमुक्त रहते हैं। फूली के तीसरे दिन ‘छोटी राखी’ के अवसर पर मवेशियों की मंदिर परिक्रमा करवाई जाती है तथा बावजी का पवित्र जल छिडक़ा जाता है। समिति ने सभी दानदाताओं व सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह मंदिर धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी क्षेत्र की पहचान बनेगा।
रुण्डेड़ा में 55 लाख की लागत से बन रहा गायरिया बावजी का संगमरमर शिखर मंदिर, निर्माण कार्य अंतिम चरण में
