महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन के अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों की घोषणा

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ करेंगे मानव मूल्यों की विशिष्ट विभूतियों का सम्मान
उदयपुर।
मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा, त्याग, सांस्कृतिक संरक्षण तथा मानवीय मूल्यों की अविरल धारा को समर्पित महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अलंकरणों की घोषणा करते हुए वार्षिक अलंकरण समारोह के संयोजक डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की उपस्थिति में फाउण्डेशन का 42वाँ अलंकरण समारोह आगामी 15 मार्च, 2026, रविवार को सायं 4.30 बजे सिटी पैलेस उदयपुर के माणक चौक प्रांगण में आयोजित होगा। फाउण्डेशन अपने उद्देश्यों के अनुरूप विगत 41 वार्षिक समारोहों में देश-विदेश की 4,972 विभूतियों एवं मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर चुका है। ये सम्मान उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को प्रदान किए जा रहे हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर समाज, राष्ट्र और विश्व समुदाय को स्थायी मूल्य प्रदान किए हैं।
कर्नल जेम्स टॉड सम्मान :
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर का कर्नल जेम्स टॉड सम्मान डॉ. मॉली एम्मा एटकिन, अमेरिका को प्रदान किया जाएगा। डॉ. एटकिन सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क में कला इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर हैं और भारतीय लघुचित्र परंपरा, विशेषतः मेवाड़ एवं राजपूत दरबारी चित्रकला की अग्रणी विदुषी मानी जाती हैं।


डॉ. एटकिन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी एवं कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। भारत आकर आपने राजस्थानी चित्रकला की परंपरा का गहन अध्ययन किया। उनकी चर्चित कृति ‘दी इंटलीजेन्स ऑफ ट्रेडिशन इन राजपूत कोर्ट पेंटिंग’ (The Intelligence of Tradition in Rajput Court Painting) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सराहना मिली और प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। मेवाड़ की चित्रकला, साहिबदीन और चोखा जैसे सिद्धहस्त कलाकारों पर उनके शोध ने वैश्विक स्तर पर मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी है।
उनका कार्य कर्नल जेम्स टॉड की उस ऐतिहासिक परंपरा का आधुनिक विस्तार है, जिसके माध्यम से मेवाड़ की संस्कृति, इतिहास और कलात्मक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित किया गया।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि भारत के प्रति सार्वभौम सम्पादित स्थायी मूल्यों की सेवाओं के उपलक्ष्य में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के कर्नल जेम्स टॉड अलंकरण के तहत दो लाख एक रुपये की राशि, तोरण, शॉल एवं प्रशस्तिपत्र भेंट किए जाएंगे।
हल्दीघाटी सम्मान :
इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का हल्दीघाटी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार कमलेश किशोर सिंह को प्रदान किया जाएगा। कमलेश किशोर भारतीय मीडिया जगत में तीन दशकों से सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत उन्होंने अल्प आयु में रेजिडेंट एडिटर के रुप में की। बाद में वे इण्डिया टूडे ग्रुप से जुड़े, जहाँ उन्होंने प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाईं।


डिजिटल पत्रकारिता में नवाचार, हिंदी पत्रकारिता को सशक्त दिशा प्रदान करने तथा नई पीढ़ी के पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। लोकप्रिय पॉडकास्ट तीन ताल में ‘ताऊ’ के रूप में उनकी उपस्थिति व्यापक जनसमूह को समसामयिक विषयों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती है। हल्दीघाटी के उन योद्धाओं की तरह, इन्होंने बदलते और कठिन भूभाग पर लड़ाई लड़ी। करियर में बार-बार अपरिचित और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया। पत्रकारिता की शुरुआत और प्रयोग करने से लेकर, इन्होंने टेलीविजन/प्रिंट मीडिया के उच्च दबाव वाले वातावरण में काम किया और बाद में डिजिटल प्लेटफॉर्म को नया रूप दिया। लल्लनटॉप की नींव रखने, उसे आकार देने और मार्गदर्शन करने तथा संपादकीय दिशा तय करने में आपकी भूमिका हिंदी पत्रकारिता के लिए नए संस्थान बनाने में आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मध्य भारत में विशाल क्षेत्रों का प्रबंधन करते हुए और लेखन प्रतिभाओं को पोषित करते हुए हिंदी पत्रकारिता की सेवा करने का उनका निर्णय, कर्तव्य, दृढ़ता और एक व्यापक उद्देश्य के लिए किए गए बलिदान की उसी भावना को प्रतिबिंबित करता है।
महाराणा उदय सिंह सम्मान :
इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु श्री मरिमुथु योगनाथन को महाराणा उदय सिंह सम्मान से सम्मानित किया जाएगा, जिन्हें देशभर में ‘ट्री मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है।


कोयंबटूर में तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (टीएनएसटीसी) के बस परिचालक के पद पर कार्यरत रहते पर्यावरण आंदोलन और विकास के लिए आपकी यात्रा प्रेरणादायी है। लगभग चार दशकों से अधिक समय से आप निरंतर वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता और जलवायु संरक्षण के कार्य में समर्पित हैं और दूसरों को प्रेरित भी कर रहे हैं। इन्होंने पाँच लाख से अधिक वृक्ष रोपे हैं, जिनमें से लगभग साढ़े तीन लाख वृक्ष आज भी जीवित हैं।
आपकी प्रेरणा से हजारों शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरण चेतना का प्रसार हुआ है। उनका जीवन संदेश “एक वृक्ष लगाना आज का कार्य नहीं, कल से किया गया वादा है”, जो सतत् विकास और पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में समाज को प्रेरित करता है।
पन्नाधाय सम्मान :
निर्धारित दायित्व सीमा से ऊपर उठकर किए गए कार्य के लिए दिया जाने वाला इस वर्ष का पन्नाधाय सम्मान, वर्ष 2017 में 35,000 फीट की ऊँचाई पर एक आपातकालीन प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले जेट एयरवेज़ की फ्लाइट 9डब्ल्यू 569 के समर्पित क्रू सदस्यों को सामूहिक रूप से प्रदान किया जाएगा।


जेट एयरवेज़ की इस उड़ान के दौरान सीमित संसाधनों, चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव और अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में क्रू ने अद्भुत संयम, साहस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया।

क्रू सदस्यों में ईशा जायकर, तेजस चव्हाण, मोहम्मद ताज हयात, कैथरीन वार्ष्णेय, सुष्मिता डेविड, एवं डेबोरा तावारेस ने मिलकर एक नवजीवन को सुरक्षित जन्म दिलाया। इसी बीच, कॉकपिट में कैप्टन प्रणव छाबडिया और कैप्टन मार्टिन फेसानेक संकट के परिचालन संबंधी पहलू का प्रबंधन करते रहे हैं। यह घटना सेवा से परे जाकर कर्तव्य, करुणा और मानवीय उत्तरदायित्व का अद्वितीय उदाहरण बनी।
उनका यह कार्य व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर अपने यात्री और आने वाले भविष्य के प्राण रक्षा का कर्तव्य निभाते हुए समाज के समक्ष अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया
उक्त सभी सम्मान मेवाड़ की उस चिरंतन भावना का प्रतीक हैं, जिसमें ज्ञान, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय करुणा को सर्वोच्च मूल्य माना गया है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इन अलंकरणों के माध्यम से न केवल विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान किया जा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का एक स्थायी मानदंड भी स्थापित किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर दिये जाने वाले इन अलंकरणों के तहत प्रत्येक विभूति को एक लाख एक रुपये की राशि, तोरण, शॉल एवं प्रशस्तिपत्र भेंट किए जाएंगे।

विशेष :
वर्ष 1996 में स्थापित कर्नल जेम्स टॉड अलंकरण से अब तक मार्क टुली, सर वी. एस. नॉयपॉल, डॉ. चितरंजन एस. राणावत, लुईजी जॉन्जी, एम.एम. कै, सुप्रसिद्ध अभिनेता-निर्माता एवं निर्देशक लार्ड रिचर्ड एटनबरो, अब्बास सादडीवाला, रूडोल्फ दम्पत्ति, सर नून, एन्ड्रयु टॉप्सफिल्ड, मिंजा यांग, प्रो. जोन डी स्मिथ, जे.पी लोस्टी, प्रो डेटन, प्रो. जोन स्ट्रेटन हावले आदि विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है।
वर्ष 1982 में स्थापित हल्दीघाटी अलंकरण से अब तक कर्पूर चन्द्र कुलिश, विनोद दुआ, प्रणव रॉय, मृणाल पाण्डे, कुलदीप नैयर, धर्मवीर भारती एवं मुम्बई के स्वतन्त्र पत्रकार मुजफ्फर हुसैन, शेखर गुप्ता, आलोक मेहता, प्रबलप्रताप सिंह, तवलीन सिंह, संजीव श्रीवास्तव, हरिन्दर बावेजा, गुलाब कोठारी, पियूष पाण्डे, राहुल कंवल, स्वाति चतुर्वेदी, सुहासिनी हैदर, राज चिंगप्पा सहित अनेक हस्तियाँ सम्मानित हो चुकी है।
वर्ष 1996 में स्थापित महाराणा उदयसिंह अलंकरण से अब तक प्रो. वीरभद्र मिश्र, अन्ना हजारे, डॉ. कस्तूरीरंगन, डॉ. तेसी थॉमस जैसी अनेक हस्तियाँ सम्मानित हो चुकी है।
वर्ष 1997 में स्थापित पन्नाधाय अलंकरण से अब तक प्रो. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, श्रीमती अरूणा रॉय, करमबीर सिंह कांग, आम्टे दम्पत्ति, कैप्टन सौंधी, पी.टी. उषा सहित कई विभूतियां सम्मानित हो चुकी हैं।

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