चित्तौड़गढ़ (मुकेश मूंदड़ा )। विहिप मातृशक्ति दुर्गावाहिनी के तत्वावधान में सुराणा मोहल्ला में फागोत्सव हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अंजली सेन ने पूजन एवं मंगलाचरण से कराई। इसके पश्चात मातृशक्ति दुर्गावाहिनी की माताओं और बहनों ने पारंपरिक फाग गीतों पर नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण कर सभी ने एक-दूसरे को फागोत्सव की शुभकामनाएं दीं। शिवानी साहू ने आगामी 8 मार्च को समरसता संगोष्ठी कार्यक्रम के आयोजित होने की जानकारी दी।
कार्यक्रम में संगीता ओझा, सपना कीर, पूर्वा साहू, प्रीति मीणा, कला सेवरिया, कोमल गुप्ता, सोनू नीलामणि, आरती प्रजापत, सुमन कंवर, देवकी साहू, भावना ओझा, सीमा राव, तनिषा सोलंकी, पुष्पा साहू, मंजू लता, वंदना सेन, मंजू साहू, भगवती आचार्य, धनिष्ठा आचार्य आदि मातृशक्ति उपस्थित रहे।
सांवरिया सेठ धाम में भक्ति और उल्लास का संगम :
प्रसिद्ध सांवरिया सेठ मंदिर में महेश नगर मंडल द्वारा फागोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। मंदिर प्रांगण में आयोजित इस आयोजन में सोनू गदिया एवं प्रतिमा काबरा ने राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकी प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। फागोत्सव के दौरान भजन-कीर्तन एवं फूलों की होली का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर सांवरिया सेठ के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित की। कार्यक्रम में वरिष्ठ सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। इस अवसर पर कौशल्या मालू, लीला सोमानी, पुष्पा डाड, लक्ष्मी राजपूत, पुष्पा राठी, कांता भराडिया, गणपत तोषनीवाल सहित अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने में सुमित्रा तोषनीवाल, रेणुका मालीवाल, सुमन जाजू, रेखा विजयवर्गी, मंजू जागेटिया, राधा जागेटिया, सुधा जागेटिया, बीना मंत्री, सुनीता लड्ढा, किरण पोरवाल, किरण भराडिया, चंचल भराडिया, सुमन काबरा एवं अंगुरबाला तोषनीवाल का विशेष सहयोग रहा, जिनकी सहभागिता से आयोजन और अधिक जीवंत बन गया। उषा सोनी एवं आशा बजाज ने “कीर्तन की है रात”, “सांवरियो हे सेठ”, “यह मस्त महीना फागुन का”, “रंग लेके चंग लेक”, “रंग मत डाल रे सांवरिया” सहित अनेक भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। मधुर भजनों की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा प्रांगण भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। फागोत्सव का यह आयोजन भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण बनकर स्मरणीय रहा।
