इंद्र ने एकलिंगजी की तपस्या कर पाई थी ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति- जगद्गुरु श्री वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज

– तीसरे प्रहर तक गूंजे कीर्तिदान गढ़वी के भक्ति सुर, झूम उठे श्रद्धालु
– भगवान हनुमानजी के विभिन्न रूपों के दर्शन का अनुभव कर रोमांचित हुए हजारों श्रद्धालु
उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत
) मीरा नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयनंदगिरी जी महाराज की पावन निश्रा में चल रहा श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ, साधना पूजा महोत्सव चरम पर है।दिनोंदिन यहां भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि महोत्सव के पंचम दिवस गुरुवार को श्री एकलिंगनाथ शिव पुराण कथा में पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने त्रिशिरा, वृत्रासुर, इंद्र प्रसंग का वर्णन किया।


गुरुदेव के श्रीमुख से पौराणिक प्रसंगों, रहस्यों को सुनकर श्रद्धालु कभी भावुक होते हैं, कभी आनन्दित होते हैं तो कभी रोमांच से भर जाते हैं। कथा में गुरुदेव ने कहा कि त्रिशिरा और वृत्रासुर दोनों भाई थे। त्रिशिरा के उत्पात से देव भी दुखी थे। इंद्र से गुहार लगाई तो इंद्र ने वज्र का एक प्रहार किया और त्रिशिरा की जीवन लीला समाप्त कर दी। अपने भाई की मृत्यु से दुखी और आक्रोशित वृत्रासुर ने इंद्र से बदला लेने की ठानी। आमना सामना हुआ तो इंद्र भी उसे डिगा नहीं पा रहे थे। क्योंकि वृतासुर को वरदान था न दिन में मारा जाऊं न रात में, न पाषाण से न शस्त्र से, न आकाश में मारा जाऊं न जल में। परेशान इंद्र प्रभु नारायण की शरण में गये। व्यथा बताई तो नारायण ने वर दिया जल से न मरे तो न सही तुम इसे समुद्र के झाग से ही मार सकोगे। इंद्र ने समुद्र कके झाग से वृतासुर का अंत कर दिया। लेकिन वृत्रासुर गुणों से असुर किंतु देवांश था। इंद्र को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इंद्र की समस्त शक्तियां क्षीण हो गई। पुनः नारायण की शरण पहुंचे। नारायण ने कहा तुम्हें ब्रह्मांड की कोई शक्ति नहीं बचा सकती सिवाय प्रभु एकलिंगनाथ जी की तपस्या से। तब इंद्र ने मेदपाट में विराजित सर्वशक्ति पुंज एकलिंगनाथ जी की कठोर तपस्या की। इंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने प्रकट हुए। उन्होंने इंद्र को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। ऐसी है दिव्यज्योति एकलिंगजी और मेदपाट की महिमा, जो अपरंपार है। गुरुदेव ने कहा प्रभु कृपा पैसे से नहीं खरीद सकते, साधना, सच्ची भक्ति से ही यह प्राप्त करना संभव है।


अपनी हथिलियों पर हनुमानजी के दर्शन कर रोमांचित हुए श्रद्धालु :
31 दिसंबर की कथा में पूज्यपाद श्री वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने घोषणा की थी कि नए वर्ष के पहले दिन की कथा में पांडाल में उपस्थित भक्तों को हनुमानजी के विभिन्न रूपों के साक्षात दर्शन का अनुभव कराएंगे। यह जानकर श्रद्धालु हैरान थे और ऐसे अवसर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आखिर वह क्षण आया। गुरुदेव ने कथा के मध्य सभी श्रद्धालुओं को सहज ध्यान में बैठाया। इसके बाद उन्हें आंखें बंद करके एकाग्रता से मंत्र सुनने को कहा गया। गुरुदेव ने एक स्वर में दुर्लभ मंत्रों का पाठ शुरू किया।

लगभग सवा घंटे तक अनवरत मंत्र पाठ के बाद गुरुदेव ने भक्तों से हाथ जोड़कर हथेलियों को खोलकर देखने को कहा। श्रद्धालु श्रद्धा और विस्मय से भरे थे। एक-एक कर उठकर श्रद्धालुओं ने हथेलियों में दिखाई दिए हनुमान जी के विभिन्न रूपों का वर्णन किया। किसी को ज्योति बिंदु लाल, हरा, नीला, पीला, सफेद रंग का दिखाई दिया, इन सभी रंगों की ज्योति दिखने का अलग अलग महत्व गुरुदेव ने बताया। जबकि कई भक्तों ने हनुमान जी के बाल रूप, वृद्ध रूप संत रूप, विशाल स्वरूप, इत्यादि विग्रह रूपों के दर्शन का अनुभव साझा किया। उदयपुर की धरा पर गुरुदेव द्वारा साधना, मंत्र शक्ति का अद्भुत दर्शन दिखाया गया।
भक्ति की स्वरलहरियों में डूबे श्रद्धालु :


चोक पुरावो, माटी रंगावो, आज मेरे गुरुवर घर आएंगे…जैसे ही प्रसिद्ध कलाकार कीर्तिदान गढ़वी ने भक्ति सुरों की तान छेड़ी तो पांडाल में मौजूद खचाखच भीड़ ने उनका तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज से आशीर्वाद लेकर कीर्तिदान ने भजनों की श्रृंखला प्रारंभ की। फिर कीर्तिदान ने ऐसी भक्ति की तान छेड़ी कि तड़के तक श्रद्धालु बिना पलक झपकाए भक्ति रस में गोते लगाते रहे। नगर में जोगी आया जैसे धमाकेदार भजन गाकर उन्होंने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर किया तो -गुरुजी दरस बिना जियरा मोरा तरसे जैसे भजन से गुरुदेव के प्रति भक्तों को श्रद्धा से ओतप्रोत कर दिया। वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे, एक बार भोले भंडारी बनके बृज की नारी, डाकोर ना ठाकुर थारा बंद दरवाजा खोल जैसे भजनों पर तो पूरा पांडाल ही भक्ति रस में झूम उठा। एक से बढ़कर एक राजस्थानी, गुजराती भक्ति गीतों से भी कीर्तिदान गढ़वी ने खूब रंग जमाया।
एमपी के पूर्व मंत्री सकलेचा ने लिया पूज्यपाद का आशीर्वाद :


मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरेंद्रकुमार सकलेचा के सुपुत्र, मप्र के पूर्व केबिनेट मंत्री नीमच जिले के जावद क्षेत्र के विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने महामहोत्सव में पहुंचकर पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज का आशीर्वाद लिया। यज्ञ की पूर्णाहुति पश्चात गुरुदेव की निश्रा में उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने श्री सकलेचा का स्वागत किया। उन्हें शॉल और प्रसाद भेंट की गई। कथा प्रवचन में मंच पर ओमप्रकाश सकलेचा ने पूज्यपाद जगद्गुरू देव का पुष्पाहार पहना कर आशीर्वाद लिया।

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