लोक जन सेवा संस्थान ने हिंदी दिवस पर किया डॉ. भानावत का सम्मान

चित्तौड़ा की सूक्ष्म पुस्तिकाओं का लोकार्पण

उदयपुर। लोक जन सेवा संस्थान (Lok Jan Seva Sansthan) ने गुरूवार को हिंदी दिवस (Hindi Divas) मनाया। संस्थान के अध्यक्ष प्रो. विमल शर्मा (Pro. Vimal Sharma) ने बताया कि 70 वर्ष पूर्व 1953 में पहला हिंदी दिवस मनाया गया जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में याद करने का निर्णय लिया था। मुख्य वक्ता और सम्मानित होने वाले डॉ. महेन्द्र भानावत (Dr. Mahendra Bhanawat) का परिचय देते हुए संस्थान महासचिव जयकिशन चौबे (Jaikishan Choubey) ने बताया कि डॉ. भानावत को साहित्य वारिधि, लोककला मनीषी, सृजन विभूति, लोकसंस्कृति रत्न, श्रेष्ठकला आचार्य जैसे सम्मान प्राप्त हुऐ हैं। डॉ. भानावत राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, राजस्थानी साहित्य भाषा और संस्कृति अकादमी, जवाहर कला केंद्र, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सदस्य रह चुके हैं।
डॉ. भानावत ने कहा कि आजादी के बाद हिन्दी भाषा देश-विदेश मे सबसे चर्चित भाषा बनी है। हिन्दी ने अपने साथ कई आंचलिक भाषाओं को भी समृद्ध किया। उन्होंने स्वयं अपने हिन्दी लेखन मे हजारों मेवाड़ी शब्दों का समावेश किया है जिसे लोगों ने खुले मन से स्वीकार किया जो आज भी प्रचलन में है। डॉ. भानावत ने लोक जन सेवा संस्थान को दायित्व दिया कि वे नव लेखकों को हर संभव प्रोत्साहित करें ताकि वे अनछुई विधाओं में शोध कर लिपिबद्ध करें।

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इस अवसर पर सूक्ष्म पुस्तिका निर्माता चन्द्रप्रकाश चित्तौड़ा (Chandraprakash Chittaura) की बनाई गई तीन सूक्ष्म पुस्तकों आधुनिक हिन्दी के जनक ‘भारतेन्दु हरिश्चंद्र की जीवनी’, ‘हिन्दी दिवस का महत्व’ तथा ‘हिन्दी वर्णमाला’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर गणेशलाल नागदा, इन्द्रसिंह राणावत, रंजना भानावत, नरेन्द्र उपाध्याय, ओमप्रकाश माली तथा मनीष गोलछा उपस्थित थे।