संसद में नियम 377 के अधीन सूचना के तहत सांसद ने रखी अपनी मांग
ओपन-कास्ट माइनिंग के कारण बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान के बारे में बताया
उदयपुर। सांसद डॉ मन्नालाल रावत ने अनुसूचित क्षेत्रों में अंडरग्राउंड माइनिंग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित नीति, आधुनिक तकनीक एवं आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग संसद में रखी, ताकि जनजातीय समुदायों की आजीविका, आस्था एवं पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ संतुलित एवं सतत खनन का मॉडल विकसित किया जा सके।
सांसद डॉ रावत ने संसद में नियम 377 के अधीन सूचना के तहत कहा कि देश के अधिकांश प्रमुख खनन क्षेत्र जैसे कोयला, एल्युमिनियम एवं लौह अयस्क इत्यादि मुख्यतः जनजाति बहुल एवं अनुसूचित क्षेत्रों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में निवास करने वाले अधिकांश जनजाति समुदाय आज भी गरीबी, सीमित आजीविका अवसरों तथा सामाजिक-आर्थिक असमानता से प्रभावित हैं। इन समुदायों का जीवन एवं उपार्जन प्रकृति, वनों एवं लघु वन उपज पर आधारित है, जो उनकी सांस्कृतिक अस्मिता, आस्था एवं पारंपरिक जीवन पद्धति का अभिन्न अंग है।
सांसद डॉ रावत ने कहा कि वर्तमान में अपनाई जा रही परंपरागत ओपन-कास्ट माइनिंग के कारण बड़े पैमाने पर भू-अधिग्रहण, दुखद विस्थापन, पर्यावरणीय क्षरण तथा सामाजिक असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिससे जनजातीय समाज का जीवन चक्र प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहा है। इसके विपरीत, अंडरग्राउंड माइनिंग कम भूमि उपयोग, न्यूनतम विस्थापन एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अधिक उपयुक्त विकल्प है, किंतु देश में इसका प्रचलन सीमित है।
सांसद डॉ रावत ने विकसित भारत के लक्ष्य एवं सरकार की सुधार एक्सप्रेस की भावना के अनुरूप अनुसूचित क्षेत्रों में अंडरग्राउंड माइनिंग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित नीति, आधुनिक तकनीक एवं आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने का आग्रह किया, जिससे जनजातीय समुदायों की आजीविका, आस्था एवं पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ संतुलित एवं सतत खनन का मॉडल विकसित किया जा सके।
अनुसूचित क्षेत्रों में अंडरग्राउंड माइनिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता: सांसद डॉ रावत
