गाेवा, राजस्थान, ओडिशा, महाराष्ट्र की लोक संस्कृति हुई साकार

मराठी लावणी और कथक के फ्यूजन ने मचाई धूम
कोरियोग्राफिक डांस में दिखा लोक नृत्यों का अनूठा संगम
उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत)।
‘लोक के रंग-लोक के संग’ थीम को सोमवार को मुक्ताकाशी मंच पर विभिन्न राज्यों के लोक गायन और लोक नृत्यों ने साकार किया। इन प्रस्तुतियों को देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। वहीं, उत्सव के दौरान शिल्पग्राम के विभिन्न थड़ों पर भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां सुबह से शाम तक दर्शकों का मन मोह रही हैं। इसके साथ ही बंजारा मंच पर ‘हिवड़ा री हूक’ में जहां मेलार्थियों ने खुद प्रस्तुतियां देकर लुत्फ उठाया, वहीं बीच-बीच में संचालक सौरभ भट्‌ट ने प्रश्नोत्तरी चलाकर प्रोग्राम को और रोचक बना दिया।

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मुक्ता काशी मंच पर सोमवार शाम मुख्य कार्यक्रम में राजस्थान के मांगणियार गायन और सफेद आंगी गेर के साथ ही डेरू डांस ने सामयीन का दिल जीता, वहीं इस प्रोग्राम को ओडिशा के संभलपुरी डांस ने द्विगुणित बना दिया। इसके साथ ही गोवा के घूमट गायन ने मंच पर गोवा का माहौल बना दिया।
इस शाम में लोक संस्कृति के अनूठे संगम को पेश कर कोरियोग्राफिक प्रस्तुति ने खूब वाहवाही लूटी। इसमें गोवा के देखनी व घोड़े मोदनी, मणिपुर के लैहारोबा, कश्मीर के रौफ, राजस्थान के लाल आंगी व चरी, कर्नाटक के पूजा कुनिता व ढालू कुनिता, महाराष्ट्र के सोंगी मुखौटा, पंजाब के लुड्‌डी तथा गुजरात के तलवार रास व राठवा नृत्यों का महासंगम दिखा। इस प्रस्तुति को तराशा दिल्ली के प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सुशील शर्मा ने। इसे देख दर्शक सम्मोहित से हो गए।
कार्यक्रम में श्रद्धा सतवीडकर एंड ग्रुप के मराठी लावणी लोक नृत्य के साथ नितिन कुमार एंड ग्रुप के कथक के खूबसूरत फ्यूजन में क्लासिकल और फोक के अनूठे संगम ने दर्शकाें का मन मोह लिया।
इससे पूर्व, डॉ. प्रेम भंडारी के निर्देशन में राजस्थानी लोक गीतों पर आधारित कर्णप्रिय मेडले की प्रस्तुती ने श्रोताओं की खूब सराहना पाई। इस प्रस्तुती में खास बात कलाकारों ने बिना लोक गायन की मूल शैली को बदले खूबसरती से इसमें क्लासिकल पुट दिया, जिस पर संगीत प्रेमी श्रोता वाहवाही कर उठे।
शाम के मुख्य कार्यक्रम के अलावा शिल्पग्राम में विभिन्न थड़ों पर भी लोकरंजक प्रस्तुतियां सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक निरंतर जारी हैं। इनमें मुख्य द्वारा के पास तुतारी, आंगन में बीन जोगी, कच्ची घोडी और बाजीगर, देवरा में गोंधल, बन्नी पर मांगणियार, सम पर घूमट, दर्पण फूड कोर्ट के पास घूमर और चकरी, भूजोड़ी पर चकरी, बड़ा बाजार नुक्कड़ पर पोवाड़ा, गोवा ग्रामीण पर कठपुतली, दर्पण द्वार पर सुंदरी और बड़ा बाजार में मसक वादन की प्रस्तुतियां और विभिन्न मॉडल्स का सुंदर प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके अलावा प्रांगण में बहरूपिया विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए मेलार्थियों का भरपूर मनाेरंजन कर रहा है।

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