राजस्थान विद्यापीठ में दो दिवसीय 47 वें अखिल भारतीय लेखांकन सम्मेलन के महाकुंभ का आगाज

लेखा शिक्षा और अनुसंधान  राष्ट्र निर्माण के दो स्तंभ –  राज्यपाल बागडे
राज्यपाल बागडे बोले – पारदर्शिता और नैतिकता से ही सशक्त होगा भारत
समय की ऑडिट करें, सफलता स्वयं आपका लेखा बन जाएगी – महामहिम बागडे
कौटिल्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक  लेखांकन में संतुलन ही सफलता का सूत्र – राज्यपाल
लेखांकन में नीतियों और मानवीय मूल्यों का संतुलन ही आधुनिक भारत की पहचान

18 राज्यों के 900 से अधिक प्रतिभागी ले रहे है भाग

उदयपुर।  लेखा शिक्षा और अनुसंधान एक-दूसरे के पूरक हैं। अनुसंधान के माध्यम से प्राप्त नवीन तथ्यों और ज्ञान को शिक्षा में समाहित करने से शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र नहीं, बल्कि वे ऐसे संस्कार मंदिर हैं, जहाँ भावी पीढ़ी में कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और मानवीय मूल्यों का बीजारोपण किया जाता है।
ये विचार रविवार को भारतीय लेखांकन परिषद उदयपुर शाखा एवं राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय  ऑल इंडिया अकाउंटिंग कॉन्फ्रेंस एंड इंटरनेशनल सेमिनार के शुभारंभ के अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल महामहिम हरिभाऊ किसनराव बागडे ने मुख्य अतिथि के रूप मंे व्यक्त किए।


महामहिम ने कहा कि समय की ऑडिट करना भी आवश्यक है समय का सर्वोत्तम उपयोग ही जीवन की सफलता का आधार बनता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने शब्दों और वाणी को अपनी सबसे बड़ी संपत्ति समझें, क्योंकि उनका प्रभाव गहरा और दीर्घकालिक होता है। प्राचीन भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए कौटिल्य के अर्थशास्त्र को रेखांकित किया और कहा कि राजकीय कोष एवं व्यय प्रणाली में पारदर्शिता, राष्ट्रहित और नैतिक मूल्यों को आधार बनाकर लेखा कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विचारों की परिपक्वता, सादगी और सत्य के प्रति साहस ये तीनों गुण मिलकर एक सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। बागडे ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे लेखांकन और वाणिज्य शिक्षा में पारदर्शिता तथा नवाचार को अपनाएं, और अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से लेखांकन के नए आयामों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें। राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे को एनसीसी केडेट्स द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया। समारेाह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती की प्रतिमा, संस्थापक मनीषी जनार्दनराय नागर एवं कवि राव मोहन सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।

वैदिक नीतियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक – भारत का उभरता लेखा दृष्टिकोण : सारंगदेवोत

प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने मेवाड़ के वीर एवं प्रेरणा स्रोत महापुरुषों  महाराणा प्रताप, मीरा बाई, पन्ना धाय, हाड़ी रानी और भामाशाह को नमन करते हुए कहा कि इन विभूतियों की त्याग, वीरता और लोकसेवा की भावना आज भी समाज के लिए दिशा-प्रदर्शक है।
सारंगदेवोत ने अपने स्वागत संबोधन में राज्यपाल बागडे की नीतियों को प्रेरणास्पद बताते हुए कहा कि उनकी नीति और धर्म-नीति समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने दो दिवसीय संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह आयोजन भारतीय वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक की नीतियों, धर्म और मानवीय सामाजिक मूल्यों को केंद्र में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लेखांकन की नवीनतम तकनीकें न केवल भारत की आर्थिक संरचना को सुदृढ़ बना रही हैं, बल्कि भारत को विश्व पटल पर एक उभरती हुई व्यवस्था के रूप में प्रतिष्ठित भी कर रही हैं।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि बदलते वैश्विक  परिदृश्य में लेखांकन विषय को परंपरागत सीमाओं से बाहर निकालते हुए उसमें नवीनता और तकनीकी नवाचारों का समावेश करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि लेखांकन शिक्षा ने समय के अनुरूप परिवर्तन नहीं अपनाए तो यह विषय इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।
प्रो. वल्लभ ने अपने ट्रेन मॉडल (ज्त्।प्छ डवकमस) की व्याख्या करते हुए बताया लेखांकन शिक्षा का रूपांतरण, नैतिक आचरणों को सुदृढ़ करना,उत्तरदायित्व की भावना को प्रबल बनाना,लेखांकन में कार्यकुशलता को प्रज्वलित करना, भविष्य की चुनौतियों का कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन करना। उन्होंने कहा कि यह मॉडल लेखांकन को नैतिकता, दक्षता और जिम्मेदारी के नए आयामों से जोड़ने की दिशा में एक अभिनव पहल है। प्रो. वल्लभ ने उपस्थित प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे परिवर्तन की प्रतीक्षा न करें, बल्कि परिवर्तन की शुरुआत करें और ऐसे लेखांकन शिल्पी बनें जो नवाचार की मशाल जलाकर देश की अर्थव्यवस्था एवं नीतियों में नया आलोक फैलाएं।

विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री प्रो. मंजू बाघमार  ने कहा कि विकसित भारत 2047 की संकल्पना को साकार करने के लिए ऐसी ठोस व्यूह रचना आवश्यक है, जो सरकारी नीति निर्माण में मार्गदर्शक भूमिका निभा सके। उन्होंने कहा कि लेखांकन के क्षेत्र को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीकी नवाचारों के साथ-साथ भारतीय परंपरा पर आधारित नैतिक ज्ञान का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। प्रो. बाघमार ने युवाओं का आह्वान किया कि वे लेखांकन के ज्ञान में मौलिकता, नैतिकता और तकनीकी दक्षता का समावेश कर अपने करियर को न केवल नई दिशा दें, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी सक्रिय योगदानकर्ता बनें।

अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय लेखांकन संघ अध्यक्ष एवं गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा के कुलपति प्रो. के. एस. ठाकुर ने अध्यक्षीय संबोधन में आई ए ए के स्थापना और संगोष्ठी के उद्देशों और कार्यप्रणाली को बताया । इसके साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा में नवाचार और नाविन शोधों को उचित मंच देने हुए विकसित भारत 2047 में अपनी भागीदारी निभाने की बात कही।  विद्यापीठ के कुलप्रमुख और कुलाधिपति भंवरलाल गुर्जर ने अपने संबोधन में इस संगोष्ठी में स्वागत और आयोजन के बारे में चर्चा करते हुए लेखाक्षेत्र की भावी संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए।

प्रो. संजय भायाणी – महासचिव, ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आईएए के स्थापना और संगोष्टी के उद्देशों और कार्यप्रणाली को बताया । इसके साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा में नवाचार और नाविन शोधों को उचित मंच देने हुए विकसित भारत 2047 में अपनी भागीदारी निभाने की बात कही। संगोष्ठी की सोविनियर के रूप में डॉ. शूरवीर सिंह भानावत, सीए हेमंत, और डॉ दुर्गा सिंह द्वारा लिखित आयकर विषयक पुस्तक का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में यंग रिसर्च अवॉर्ड  सहायक आचार्य डॉ अभिषेक एन को प्रदान किया गया। संचालन डाॅ. हीना खान, डाॅ. हरीश चैबीसा ने किया जबकि आभार आयोजन सचिव प्रो. शूरवीर सिंह भानावत ने जताया।

इस मौके पर भूपाल नोबल्स संस्थान के प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड, सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी गुजरात के कुलपति प्रो. प्रताप सिंह चैहान, प्रो. बीएल वर्मा,  पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्वर राव, प्रो. केलाश सोडानी,  प्रो. जी. सौरल  पूर्व अध्यक्ष भारतीय लेखा परिषद, रजिस्ट्रार डाॅ. तरूण श्रीमाली, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. मलय पानेरी, डाॅ. पारस जैन, डाॅ. युवराज सिंह राठौड, डाॅ. भवानीपाल सिंह, डाॅ. धमेन्द्र राजोरा, डाॅ. बलिदान जैन, डाॅ. रचना राठौड, डाॅ. अमी राठौड, डाॅ. सुनिता मुर्डिया, डाॅ. नीरू राठौड, डाॅ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ.शिल्पा वर्डिया, डॉ. शिल्पा लौढा,  डॉ. पुष्पकांत शाकद्वीपीय, डॉ. अभय जारौली, डॉ. हेमंत कडुनिया, डाॅ. पंकज रावल, डाॅ. हेमेन्द्र चैधरी सहित देश भर से आये प्रतिभागी उपस्थित थे।

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