वीरविनोद ग्रंथ में संगृहीत संस्कृत प्रशस्तियों का भावानुवाद

अभिलेख इतिहास के साक्ष्य एवं प्राणतत्त्व – लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
उदयपुर।
मेवाड़ के वृहद इतिहास ‘वीरविनोद’ में संग्रहीत संस्कृत प्रशस्तियों के हिन्दी अनुवाद खण्ड का सिटी पैलेस, उदयपुर में श्रीजी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विमोचन किया। ‘वीरविनोद’ न केवल मेवाड़ का इतिहास है, अपितु यह इतिहास के वैश्विक सन्दर्भों को आरेखित करने वाला विश्वकोश है जिसे महाराणा सज्जनसिंह ने अपने राजत्वकाल में कविराज श्यामलदास द्वारा कलमबद्ध करवाया था। डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने प्राप्त अभिलेखों को इतिहास के साक्ष्य और प्राणतत्त्व बताया। साक्ष्यों के बगैर इतिहास की मौलिकता पर प्रश्न उठने लगते है।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि डॉ. मधुबाला जैन ने लगभग डेढ़ वर्षों के अथक प्रयासों से वीरविनोद में दिये गये संस्कृत प्रशस्तियों और वृतांतों का सरल हिन्दी अनुवाद किया है। मेवाड़ में प्राचीनकाल से ही संस्कृत भाषा का प्रचलन रहा है। मेवाड़ प्रदेश में ई.पू. की शताब्दियों में संस्कृत भाषा का व्यवहार होता था। मेवाड़ के कई महाराणाओं की शिलांकित प्रशस्तियां संस्कृत में प्राप्त होती है। वीरविनोद में संगृहीत इन प्राचीन शिलालेखों के अनुवाद से विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं के साथ ही सामाजिक एवं धार्मिक वृत्तान्त भी प्राप्त होते है।

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