चार देशों के कलाकारों के सात सुरों से सजा सातवां संगीत महाकुंभ
– कनिका कपूर, डोबेट ग्नाहोरे, सुकृति प्रकृति कक्कड़, टिविजा़ और सारंगी आर्केस्ट्रा के पॉप, बॉलीवुड और लोकसंगीत ने मचाई धूम
उदयपुर (डॉ. तुक्तक भानावत)। सर्द रात और मंच पर कनिका कपूर हो तो मनोरंजन का तड़का लगना तय है। शुक्रवार को वेदांता उदपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल में कनिका के मंच पर आते कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। जमकर धमाल मचा। एक के बाद एक कनिका न अपने हिट गाने सुनाए और सर्द रात में भी लोगों में जोश भर दिया। देर रात तक श्रोता कनिका के गीतों पर झूमते नजर आए।

पता ही नही चला की कब रूह तक संगीत से लबरेज हो गयी कब अलमस्त हुए, कब खुद से ही मन गुनगुनाने, थिरकने और विश्व संगीत को आत्मसात करने लगा। मौका था शुक्रवार को उदयपुर में शुरू हुए वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल के रंगारंग आगाज का जिसमें संगीत की दुनिया के जाने माने कलाकारों ने अपनी बेहतरीन और यादगार पेशकश से सभी का मन मोह लिया।

चिटियां कलाइयां वे गाने के साथ जब कनिका ने महोत्सव का मंच संभाला तो बेसब्री से इंतजार कर रहे श्रोताओं ने शोर मचाकर उनका भव्य स्वागत किया। श्रोताओं के जोश को देखकर कनिका ने भी उत्साहित होकर बिना रुके लगातार एक के बाद एक हिट गानों की प्रस्तुति दी। कनिका ने लोगों का उत्साह देखकर उन्हें निराश नहीं किया और ढेर सारे गाने सुनाए। तेनू काला चश्मा जंचदा है… सुबह होने ना दें… लत लग गई… तेरा लौंग लवाचा.. आशिक बनाया…बिजली-बिजली…गुलाबी आंखें… अंबर सरिया… कजरा मोहब्बत वाला… झुमका गिरा रे जैसे गीतों को सुनाकर उन्होंने संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। प्रस्तुतियों का सिलसिला थम गया लेकिन गीतों को सुनने से श्रोताओं का मन नहीं भरा। कनिका जब चुप होती तो श्रोता वन्स मोर वन्स मोर चिल्लाने लग रहे थे।

प्रारंभ में उदयपुर जिला कलेक्टर नमित मेहता, वेदांता हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण मिश्रा, वित्तीय अधिकारी संदीप मोदी और सहर के संस्थापक निदेशक संजीव भार्गव ने श्रोताओं को संबोधित कर कार्यक्रम का आगाज किया। सहर के संस्थापक निदेशक संजीव भार्गव ने सभी अतिथियों एवं दर्शकों का अभिवादन करते हुए फेस्टिवल को सफल बनाने के लिए सभी के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।

इसके बाद महोत्सव के अंतर्निहित विषय ‘राजस्थान के भूले हुए संगीत वाद्ययंत्रों और परंपराओं का संरक्षण और प्रचार’, जो कि सारंगी की प्रस्तुती पर केंद्रित है इसके तहत् सारंगी की स्वरलहरियों से शुरू हुआ। यार मोहम्मद लंगा और साथियों ने सारंगी पर संगत कर जब जानी मानी राजस्थानी धुनें छेडी तो विदेशी और देशी पर्यटक आनंदविभोर हो गये, सारा माहौल सारंगीमय हो गया। युवा पीढ़ी के सारंगी की ओर आकर्षण से इसके सरंक्षण का संदेश सफल होता नजर आया। चार देशों के कलाकारों के साथ जब संगीत प्रेमियों का दिल और ताल मिली तो हर कोई मन मस्त होकर गाने और सुरों पर झूमने लगा।
मंच पर उत्तरी अफ्रीकी स्वाद लाते हुए, अल्जीरियाई ब्लूज-रॉक बैंड तिविजा ने बर्बर और चाबी प्रभावों से प्रभावित ऊर्जावान लाइव परफोरमेंस दी। बैंड के 9 सदस्यों ने अपनी अनूठी पॉप और रॉक का फ्यूजन की प्रस्तुती दी।
सोफियाने बेलाइड के नेतृत्व में, रॉक और रेगिस्तानी ब्लूज के मिश्रण ने दर्शकों को माघरेब की कहानी कहने की परंपराओं से परिचित कराते हुए अपने संगीत को अलग रूप में परिभाषित किया।
शाम का मुख्य आकर्षण ग्रैमी पुरस्कार विजेता डोबेट ग्नाहोरे का इलेक्ट्रिफाइंग अफ्रोपॉप की प्रस्तुति थी। डोबेट ने संगीत से सजी अपनी धुनों प्रभावशाली मंच उपस्थिति, डायनेमिक डांस मूव्ज़ और स्फुर्ति से भरपूर लय ने दर्शकों को रोमांचित कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शनिवार को ये रहेंगे आकर्षक का केन्द्र:
सहर के संस्थापक निदेशक संजीव भार्गव ने बताया कि शनिवार को जाने-माने कार्नेटिक म्यूजिशियन रित्विक रज़ा, ईरान के डेलगोचा एंसेम्बल पर्शियन क्लासिकल म्यूजिक जैसे कलाकार मेजबानी करेंगे, जो उदयपुर की सर्द सुबह में मधुर स्वरलहररियों के साथ मांजी के घाट पर वाद्य यंत्र पर प्रस्तुति देंगे। दोपहर में चिजाई पॉप रॉक इलेक्ट्रो एक्योस्टिक, कुर्दिस्तान और तुर्की के संगीत को प्रस्तुत करने वाले अली डोगन गोनल्ट्स, स्वीडेन के प्रसिद्ध संगीत कलाकार कर्ष काले और पीटर टेग्नर की संगीतमय धुनें फतेहसागर झील की धुनों पर साथ देगी। शाम को मंच सारंगी की धुन के बाद लोककलाकार कुतले खान लोक संगीत, मलोया जिसकाकन, इण्डियन पॉप रॉक इफोरिया एवं कंटेम्प्ररी जिप्सी म्यूजिक बैंड रोमेनो ड्रोम अपने संगीत से संगीत प्रेमियों को लुभाएंगे।