उदयपुर : इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया उदयपुर लोकल सेंटर के मानद सचिव इंजीनियर पीयूष जावेरिया ने बताया कि दूरसंचार अब केवल टेलीफोन कॉल या इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रह गया है। यह आधुनिक दुनिया की तंत्रिका तंत्र बन गया है। भेजा गया हर संदेश, अटेंड की गई हर ऑनलाइन क्लास, किया गया हर डिजिटल भुगतान, समन्वित की गई हर आपातकालीन सेवा और आज किया गया हर व्यावसायिक लेन-देन मजबूत दूरसंचार नेटवर्क पर निर्भर करता है। गांवों से लेकर महानगरों तक, दूरसंचार ने भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों को जोड़ा है और समाजों के कामकाज के तरीके को बदल दिया है। इसने टेलीमेडिसिन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा में क्रांति ला दी है, लाखों छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा को सक्षम बनाया है, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसायों को सशक्त बनाया है, ई-सेवाओं के माध्यम से शासन को मजबूत किया है और किसानों, उद्योगों, बैंकिंग प्रणालियों, परिवहन और आपदा प्रबंधन को सहयोग प्रदान किया है।
मुख्य वक्ता इंजी. इंजीनियर प्रतापसिंह तलेसरा निदेशक, पायरोटेक इलेक्ट्रॉनिक प्रा लि, ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार इंजीनियरिंग वर्तमान समय में सबसे तेजी से विकसित होने वाली इंजीनियरिंग शाखाओं में से एक है। डिजिटल युग में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। जहाँ कंप्यूटर साइंस ने सॉफ्टवेयर और डेटा प्रोसेसिंग के क्षेत्र में क्रांति लाई है, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार सम्पूर्ण संचार व्यवस्था और डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं। आज के समय में संचार ही जीवन रेखा बन चुका है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, रक्षा, आपदा प्रबंधन तथा प्रशासन जैसे लगभग सभी क्षेत्र प्रभावी और निर्बाध संचार प्रणाली पर निर्भर हैं। डिजिटलीकरण के इस दौर में मजबूत संचार नेटवर्क आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुख्य वक्ता इंजीनियर हेमंत पांडे, आईईएस बीएसएनएल के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम में रेसिलिएंस को मजबूत करने की तुरंत जरूरत और मॉडर्न समाज की जरूरी लाइफ लाइन के तौर पर डिजिटल टेक्नोलॉजी की बढ़ती अहमियत पर ज़ोर दिया। टेरेस्ट्रियल कम्युनिकेशन नेटवर्क,सबमरीन केबल, सैटेलाइट सिस्टम और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल कनेक्टिविटी की रीढ़ हैं और इसलिए इन्हें समाज के सभी वर्गों के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित, भरोसेमंद और एक्सेसिबल रहना चाहिए। उन्होंने भूकंप, हरिकेन, सुनामी और बाढ़ जैसी क्लाइमेट इमरजेंसी से इन डिजिटल लाइफ़लाइन पर बढ़ते खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने साइबर-अटैक और गलत जानकारी फैलाने वाले कैंपेन के बढ़ते खतरे के अलावा, युद्ध और आतंकवादी हमलों की वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाली खराबी का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि जब भी कम्युनिकेशन नेटवर्क फेल होते हैं, तो बिज़नेस रुक जाते हैं, इमरजेंसी सर्विस को तालमेल की गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रेसिलिएंस का मतलब है यह पक्का करना कि डिजिटल सिस्टम रुकावटों का सामना करने, उनके हिसाब से ढलने और उनसे तेज़ी से उबरने में काबिल हों, जिससे जान और रोज़ी-रोटी दोनों सुरक्षित रहे। उन्होंने डिजिटल रेसिलिएंस को मजबूत करने के लिए किए जा रहे कई ज़रूरी नेशनल इनिशिएटिव और एक्शन पर भी ज़ोर दिया। इनमें केंद्र और केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और टेलीकम्युनिकेशन सर्विस को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर घोषित करना आज की आपस में जुड़ी दुनिया में, रेजिलिएंट कम्युनिकेशन सिस्टम सिर्फ़ टेक्नोलॉजिकल ज़रूरतें नहीं हैं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी, डिजास्टर मैनेजमेंट, इकोनॉमिक स्टेबिलिटी और पब्लिक वेलफेयर के लिए भी बहुत ज़रूरी हैं।
समारोह के वक्ता(कर्नल) वी.एस. तंवर निदेशक (तकनीकी), जनहित टेलीकॉम प्रा. लि ने रक्षा सेवाओं में संचार प्रणालियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ASCON, AREN, C4ISystems तथा उपग्रह संचार प्रणाली जैसी आधुनिक सैन्य संचार व्यवस्था की भूमिका को समझाया और कहा कि प्रभावी एवं विश्वसनीय संचार किसी भी सैन्य अभियान की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाता है। पूर्व के युद्ध अभियानों की तुलना में “ऑपरेशन सिंदूर” के उद्देश्यों की प्राप्ति में सक्षम और सुदृढ़ संचार व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने “रेज़िलिएंस” को कठिन परिस्थितियों में स्वयं को अनुकूलित करने, पुनः उभरने तथा और अधिक सशक्त बनने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया। रेसिलिएंस को सुदृढ़ बनाने में प्रौद्योगिकी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है तथा एक सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत संचार प्रणाली में निवेश करना समय की आवश्यकता है, ताकि देश की डिजिटल एवं सामरिक संरचना को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाया जा सके। इंजी पीयूष जावेरिया ने संचालन किया।

