99 मिली मीटर की बढ़ी हुई तिल्ली के पास भी मिली गांठ
उदयपुर। पिछले 12 साल से पेट दर्द की शिकायत से परेशान 24 वर्षीय युवक को आखिरकार सही बीमारी का पता चला। युवक बार-बार पेट में गैस की समस्या समझकर खाली पेट एंटासिड दवाइयां लेता रहा। लेकिन पेट फूलने, सूजन बढ़ने और तकलीफ अधिक होने पर उसने जीबीएच जनरल हॉस्पिटल के गैस्ट्रो विभाग में जांच कराई। यहां सीटी स्कैन में उसके पेट में लिवर के पास 378 मी.मी. की गांठ और तिल्ली (स्प्लीन) के पास 99 मी.मी. की गांठ होने का पता चला। गांठ के कारण पेट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित था।

अस्पताल के गैस्ट्रो एवं हेपेटोबिलियरी सर्जन डॉ. आकांक्षा सोनी ने करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन कर गांठ को बाहर निकाला। चिकित्सकीय भाषा में इस बीमारी को हाइडेटिड सिस्ट कहा जाता है। यह जटिल सर्जरी डॉ. आकांक्षा के साथ डॉ. पाषुपत भानुदा, निष्चेतना विभाग से डॉ. राजनेंद्र शर्मा, डॉ. कुणाल और ओटी नर्से राजेष्वरी और संदीप की मौजूदगी में की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ और पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे तीसरे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
जानवरों से फैलती है बीमारी :
हाइडेटिड सिस्ट एक परजीवी संक्रमण के कारण बनने वाली गांठ है, जो आमतौर पर लिवर जैसे अंगों को प्रभावित कर सकती है। यह संक्रमण संक्रमित कुत्तों और अन्य संक्रमित जानवरों के संपर्क या उनके मल से दूषित भोजन-पानी के जरिए मनुष्यों तक पहुंच सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार मरीज लंबे समय तक बीमारी से अनजान रहते हैं।
समय पर इलाज नहीं होने पर बढ़ सकता था खतरा :
चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, समय पर इलाज नहीं होने पर हाइडेटिड सिस्ट के कारण लिवर में संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यदि सिस्ट फट जाए, तो उसके भीतर मौजूद सामग्री शरीर में फैलने से गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया या संक्रमण जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक बीमारी का इलाज नहीं होने पर मरीज की स्थिति और जटिल हो सकती है। इस मामले में समय पर जांच और सर्जरी से मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद मिली।
