श्रृद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया श्री कल्लाजी का 483 वां जन्मोत्सव

चित्तौड़गढ़ (मुकेश मूंदड़ा )। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ पर श्रावण शुक्ला अष्टमी गुरुवार को कल्याण नगरी के राजाधिराज श्री कल्लाजी का 483 वां जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। प्रात: मंगला दर्शन के साथ ही 51 द्रव्यों से ठाकुरजी का नमक-चमक के साथ महारूद्राभिषेक किया गया। तदुपरांत ठाकुरजी का मन भावन श्रृंगार किया गया। सतरंगी फूलों से सजी वेदपीठ पर ठाकुरजी सहित पंच देवों का आकर्षक श्रृंगार हजारों कल्याण भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। इसके साथ ही श्रावण मास में झूला महोत्सव की महत्ता के अनुरूप ठाकुरजी के बाल विग्रह को पालने में विराजित कर समूचे वेदपीठ की झांकी को द्विगुणित करने में कोई कोर कसर नहीं रखी।
5100 कमल पुष्प किए अर्पित :
जन जन के आराध्य ठाकुरजी के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर 5100 कमल पुष्प से विशेष पूजा अर्चना करने के साथ ही लगभग ढाई क्विंटल गुलाब के पुष्प से श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना करने के फलस्वरूप समूचा वेदपीठ परिसर भीनी-भीनी महक से सुगंधित हो गया।
नजरानों का लगा ढेर :
वीरवर कल्लाजी के पावन जन्मोत्सव पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा स्वर्ण रजत के आभूषण के साथ ही मोतियों से जड़े हार एवं अन्य श्रंगार सामग्री और बडी संख्या में विविध प्रकार के वस्त्राभूषण न्यौछावर करने से नजरानों का ढेर लग गया। हर कोई श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलख पाकर मनवांछित फलों की प्राप्ति की कामना के साथ स्वयं को धन्य करता नजर आया। नजरानों में वीर-वीरांगनाओं द्वारा कई प्रकार के आभूषण एवं मेवाड़ी वेशभूषा के साथ नानाविध मिष्ठान, देवी देवताओं के छायाचित्र, पुष्प गुच्छ, पवित्र तीर्थ स्थलों से पवित्र जल मंगवाया गया। कैलाश धाम की पावन मिट्टी, सैकड़ो प्रकार के इत्र, डेढ़ लाख राम नाम से सहित कही उपहार भेंटकर ठाकुरजी के रंग में रंगने के लिए अबीर गुलाल लगाकर हजारों कल्याण भक्त आनंदित होते नजर आए।
आसपास के गांवों से आए पदयात्रियों ने किए दर्शन :
ठाकुर श्री कल्लाजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में बिनोता, नयागांव, कन्नौज, पुठौली, शम्भुपुरा सहित आसपास के गांवों एवं कल्याण नगरी के दूर-दराज के क्षेत्रों में निवासरत कल्याण भक्त बेण्ड बाजों के साथ ठाकुरजी के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे। जिनकी वेदपीठ के न्यासी एवं पदाधिकारियों ने अगवानी की। दूसरी ओर इन दिनों सांवरियाजी और बाबा रामदेव को जाने वाले पदयात्री भी ठाकुरजी के दर्शन करने के लिए पहुंचे, जिन्हें वेदपीठ की ओर से अल्पाहार सुलभ कराया गया।
विद्यालयों में मनाया ठाकुर जी का जन्मोत्सव ;
कल्याण नगरी के लगभग 150 राजकीय एवं निजी विद्यालयों में ठाकुरजी श्री कल्लाजी का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान वेदपीठ से जुड़े वीर वीरांगनाओं द्वारा समूह बनाकर विद्यालयों में पहुंचते हुए हजारों विद्यार्थियों को ठाकुरजी के जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके जीवन परिचय से अवगत कराकर मूंह मीठा कराया गया।
प्रमुख चौराहा पर किया आत्मिक स्वागत एवं अभिनन्दन ;
कल्याण नगरी के राजाधिराज के प्राकट्योत्सव के पावन अवसर पर वीर-वीरांगनाओं द्वारा नगर के प्रमुख चौराहों पर आगंतुक और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के जन्मदिवस की बधाई के साथ मूंह मीठा कराकर उनका आत्मिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। दूर दराज से आए विभिन्न कल्याण भक्तों ने जय श्री कल्याण के अभिवादन के साथ अपनी ओर से भी ठाकुरजी के जन्मोत्सव की बधाई दी।
क्षमापना पर्व के रूप में मनाया जन्मोत्सव ;
वेदपीठ की परंपरा अनुसार विगत 2 दशक से ठाकुरजी श्री कल्लाजी का जन्मोत्सव क्षमापना पर्व के रूप में मनाया जाता रहा हैं। इसी कड़ी में श्रावण शुक्ला अष्टमी गुरुवार को भी हजारों कल्याण भक्तों को एक दूसरे से क्षमा याचना के साथ ठाकुरजी के जन्मदिवस की बधाई देते देखा गया। इतना ही नहीं आधुनिक संचार माध्यमों से भी कल्याण भक्तों ने दूर दराज पर निवासरत अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों को ठाकुरजी के जन्म दिन की बधाई देते हुए वर्ष पर्यन्त हुई गलतियों एवं भूलों के लिए क्षमा याचना कर इस दिन को क्षमापना पूर्व के रूप में निरूपित किया।
भजनानंदी स्वर लहरियों से गुंजा वेदपीठ परिसर :
ठाकुरजी श्री कल्लाजी के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायक पंडित प्रहलाद कृष्ण शर्मा एवं साथियों द्वारा सवेरे से देर रात तक ठाकुरजी के मन भावन भजनों की प्रस्तुतियां दी गई। इसके फलस्वरूप समूचा वेदपीठ परिसर भजनानंदी स्वर लहरियों से गुंजता रहा। इस दौरान कई श्रद्धालु अपने आराध्य के मन भावन भजनों की स्वर लहरियों से आनंदित होते नजर आए।
गौमाता को भोग एवं अभ्यागतों को भोजन व वस्त्राधि भेंट :
ठाकुरजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में वेदपीठ की ओर से कल्याण गौशाला में गायों को लापसी का भोग लगाने के साथ ही अन्य गौशालाओं में भी गौमाता को हरा चारा खिलाया गया। वहीं पक्षियों को दाना व चिटियों को कुलर देकर प्राणी मात्र के साथ जन्मोत्सव मनाने का स्तुत्य प्रयास किया गया। इस दौरान अभ्यागतों को मिष्ठानयुक्त भोजन एवं वस्त्राधि भेंटकर उन्हें भी ठाकुरजी के जन्मोत्सव की बधाई दी गई।