दर्शन डेंटल कॉलेज में एनएएम थैरेपी की सफलता से ओष्ठ एवं तालु विदर से पीड़ित बच्चों में आशा की किरण

उदयपुर : जन्मजात ओष्ठ एवं तालु विदर  से पीड़ित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में, दर्शन डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल, उदयपुर में पीडियाट्रिक एवं प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग की अध्यक्ष डॉ. रुचि अरोरा और उनकी टीम के नेतृत्व में नासोएलवोलर मोल्डिंग (एनएएम) थेरेपी द्वारा सफलतापूर्वक दो नवजात शिशुओं का इलाज किया गया। इनमें एक 3.5 माह का बालक तथा एक 6 माह की बालिका शामिल थे, जिन्हें आरएनटी अस्पताल, उदयपुर के प्लास्टिक सर्जन द्वारा रेफर किया गया था। 6 माह की बालिका में सफल एनएएम थेरेपी के पश्चात होंठ सुधार सर्जरी, आरएनटी अस्पताल में सफलतापूर्वक की गई, जिससे चेहरे की बनावट और कार्यात्मक परिणामों में और अधिक सुधार की उम्मीद है।
डॉ. रुचि अरोरा ने बताया कि एनएएम थेरेपी के माध्यम से प्रारंभिक हस्तक्षेप से शल्य चिकित्सा के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है। इससे आवश्यक सर्जरी की संख्या घटती है और बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। एनएएम एक गैर-शल्य चिकित्सा उपचार है, जो ओष्ठ, नासिका एवं नासोएलवोलर सेगमेंट के आकार को सुधारात्मक सर्जरी से पूर्व पुनःआकारित करने हेतु प्रयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य न केवल सौंदर्य में सुधार लाना है, बल्कि शल्य चिकित्सा को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाना भी है।
दर्शन डेंटल कॉलेज एक स्नातकोत्तर संस्थान होने के नाते ऐसे मरीज़ों का उपचार करने के लिए प्रोत्साहित एवं तत्पर रहता है, जो सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल है। यह उपचार दर्शन डेंटल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विकास पुनिया की ओर से पूर्णतः निशुल्क प्रदान किया गया। माता-पिता को उपकरण की देखभाल, उपयोग की विधि एवं नियमित फॉलोअप से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
डॉ. विकास पुनिया ने बताया कि डॉ. विकास चौधरी एवं उनकी टीम (प्लास्टिक सर्जरी विभाग, आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) के सहयोग से, भविष्य में इस प्रकार के जन्मजात विकारों से ग्रसित अधिक शिशुओं को लाभ पहुँचाया जा सकेगा। साथ ही, इस नवाचारी थेरेपी को और अधिक व्यापक एवं उन्नत स्तर तक ले जाने के प्रयास भी किए जाएँगे।
दोनों परिवारों ने इस सेवा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उनके बच्चों के चेहरे की बनावट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे भविष्य में की जाने वाली सर्जरी अब अपेक्षाकृत सरल प्रतीत हो रही है।

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