ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ मां… ने किया मंत्रमुग्ध

मुक्ताकाशी मंच पर कई राज्यों की लोक संस्कृति की झलक देख दर्शक हुए अभिभूत
उदयपुर।
जब बनी-ठनी महिलाओं ने गोल घेरे में घूमते हुए घेरदार, रंग-बिरंगे और भारी घाघरे से नयनाभिराम घेरा बनाया तो दर्शकों ने तालियों से शिल्पग्राम को गूंजा दिया। इसमें सजी-धजी महिलाओं की लयकारी, भाव-भंगिमाएं और तालबद्धता ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बता दें, यह लोकनृत्य घूमर किशनगढ़ (राजस्थान) किशनगढ़ की प्रसिद्ध “बणी-ठणी” चित्रकला शैली से जुड़ी है, जो अपने सौंदर्य और कला के लिए दुनिया भर में मशहूर है, और महाराजा सावंत सिंह (नागरीदास) के समय में विकसित हुई। सर्वविदित है कि ‘घूमर’ राजस्थान की लोक संस्कृति का अहम हिस्सा है और अक्सर त्योहारों और समारोहों में किया जाता है। रविवार की शाम इस लोकनृत्य की प्रस्तुति ने खचाखच भरे मुक्ताकाशी मंच का मन मोह लिया। तमाम दर्शकों ने झूमते हुए नर्तकियों के कौशल को खूब सराहा।


इसके साथ ही राजस्थान के ही लोकनृत्य तेराताली में नर्तकियाें ने अपने पैरों पर बंधे 9, कोहनियों और हाथों पर बंधे 2-2 बजाकर ताल दी तो दर्शकों ने खुलकर दादा दी। बता दें, यह प्रदेश की कामड़ जाति का विशेष और एकमात्र लोकनृत्य है, जो बैठकर किया जाता है, फिर भी दर्शकों का मन मोह लेता है। इसमें नर्तकियों ने मुंह में कटार दबा सिर पर कलश रखकर नृत्य किया तो दर्शकों ने तालियों से शिल्पग्राम को गूंजा दिया।

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इनके साथ ही पश्चिम बंगाल के राय बेंसे में एक्रोबेटिक करतब, महाराष्ट्र के लावणी लोक नृत्य में नर्तकियों के शृंगार व अदाकारी, राजस्थान के कालबेलिया डांस में नर्तकियों के करतबों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया छाऊ डांस में शास्त्रीय के साथ मार्शल आर्ट के खूबसूरत सम्मिश्रण के साथ ही सिद्धि धमाल की धमाकेदार पेशकश ने दर्शकों को दांतों तले अंगुली दबाने को विवश कर दिया। राजस्थान के मेवात क्षेत्र के भपंग वादन से लोक कलाकार श्रोताओं के दिलों के तारों को झंकृत कर दिया। वहीं, उत्तराखंड के मीठी छेड़छाड़ वाले छापेली लोक नृत्य ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया, तो असम का बिहू डांस भी दर्शकों को खूब भाया। इनके साथ ही मणिपुर की नृत्य शैली के साथ मार्शल आर्ट के अनूठे संगम वाले थांग-ता स्टिक डांस ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। वहीं, मस्ती के लिए पहचाने जाने वाले पंजाब का भांगड़ा डांस पर दर्शक अपनी जगह पर झूमने लगे। सिंघी छम, कर्ण ढोल और ब्रज के मयूर नृत्य की प्रस्तुतियां ने भी दर्शकों को खूब रिझाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहिता दीक्षित और माधुरी शर्मा ने किया।
मुख्य कार्यक्रम से पूर्व मुक्ताकाशी मंच पर सुंदरी वादन, कुच्छी भजन और भवई नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। शिल्पग्राम के बंजारा मंच पर चल रहे ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम के रविवार को भी हर उम्र के मेलार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। इसमें मेलार्थियों ने खुलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम समन्वयक सौरभ भट्‌ट ने प्रश्नोत्तरी से कार्यक्रम को और रोचक बना दिया। क्विज में सही उत्तर देने वालों को हाथों-हाथ उपहार भी दिए जा रहे हैं। शिल्पग्राम में विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक अलग-अलग प्रस्तुतियां मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन कर रही हैं। इनमें शुक्रवार को मुख्य द्वार आंगन पर आदिवासी गेर व चकरी, आंगन के पास बाजीगर, देवरा पर तेरहताली, भूजोड़ी पर बीन जोगी व भवई, बन्नी पर कुच्छी ज्ञान, सम पर मांगणियार गायन, पिथौरा पर गलालेंग (लोक कथा), पिथौरा चबूतर पर घूघरा-छतरी (मीणा ट्राइब), बड़ा बाजार पर रिखिया ज्ञान (झारखंड), कला कुंज फूड कोर्ट पर पावरी (महाराष्ट्र-गुजरात का कोकणा जनजाति का नाच), गाेवा ग्रामीण पर कठपुतली, दर्पण द्वार पर सुंदरी, दर्पण चौक पर महाराष्ट्र और दादरा व नगर हवेली का पारंपरिक आदिवासी नृत्य तारपा और पीपली पर नाद की प्रस्तुतियां ने भी मेलार्थियों का भरपूर मनोरंज किया ।
वहीं, शिल्पग्राम्र प्रांगण में विभिन्न स्थानों पर घूमते हुए बहरूपिये अपनी वेशभूषा और अदाकारी से मेलार्थियों का खासा मनोरंजन कर रहे हैं। इसके अलावा प्रांगण में स्कल्पचर्स, खूबसूरत झोंपड़ों सहित कई स्थान मेलार्थियों के फेवरिट सेल्फी पॉइंट्स बन चुके हैं।


केलिफोर्निया (अमेरिका) की जेरिश, सेरिंग और एप्रोल रविवार को शिल्पग्राम उत्सव में स्टाल्स का भ्रमण करते हुए दिखीं। उन्हें लगा कि शिल्पग्राम वाकई गांव ही है, जब उन्हें बताया गया कि वास्तव में इस जगह को गांव के रूप में डेवलप किया गया है, तो उन्हें सरप्राइज हुआ। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के उप निदेशक (प्रोग्राम) पवन अमरावत के इस बारे में पूछने पर जेरिश बोलीं, ‘सरप्राइज्ड, शिल्पग्राम हेज बिन डेवलप्ड हियर लाइक ए विलेज, वी थोट देट इट्स ए रियल विलेज!’ फेस्टिवल के बारे में पूछने पर जेरिश की साथी सेरिंग ने कहा, ‘ओ, वेरी नाइस, वी एंजॉय्ड सींग दिस फेस्टिवल वेरी मच।’ इन तीनों फ्रेंड्स ने सभी स्टाल्स देखे उन पर रखे हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे और उनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में दस्कारों से बात की। एप्रोल ने हस्त शिल्प के उत्पादों के बारे में कहा, ‘एवरी प्रोडक्ट एट एवरी स्टाल इस एट्रैक्टिव एंड एक्सीलेंट।’ इतने वृहद स्तर पर आयोजन की सफलता को देख ये विदेशी सैलानी महिलाएं भी इसके प्रबंधन की तारीफ किए बना नहीं रह सकीं। आइरिश और एप्रोल ने फेस्टिवल के भ्रमण के बाद कहा, ‘द मैनेजमेंट एंड अरैंजमेंट ऑफ दिस फेस्टिवल आर फ्लालेस एंड प्राइजवर्दी एंड सुपर्ब।’ और तो और, इन विदेशी महिलाओं के साथ स्थानीय मेलार्थी युवतियों ने फोटो भी खिंचवाए और इनसे मिलकर खुशी का इजहार किया।

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