सोमनाथ शिवलिंग का भगवान महाकाल से मिलन मंगलवार को

महाकालेश्वर मंदिर में होगी स्वागत यात्रा, महारूद्राभिषेक एवं ज्योतिर्लिंग दर्शन
उदयपुर।
सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा 30 दिसम्बर को उदयपुर पहुंचेगी । यहां महाकालेश्वर मंदिर में दोनों शिवलिंग और महाकाल का मिलन कराया जाएगा और सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग अंश प्रदर्शित किये जायेंगे।
आर्ट आफ लिविंग वैदिक धर्म संस्थान समन्वयक और प्रशिक्षिका प्रियंका शर्मा ने बताया कि शिवलिंग का उदयपुर में पूजन किया जाएगा। सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग के कुल 11 अंश अग्निहोत्री ब्राह्मण ने अपने पास रखे थे, जिन्हें श्रीश्री रविशंकरजी को दिया गया था। गत वर्ष से यह अंश देश के प्रमुख शहरों में दर्शन के लिए ले जाए जा रहे हैं। प्रियंका ने बताया कि शिवलिंग के जो अंश उदयपुर लाए जा रहे हैं, उनका महाकाल से मिलन कराया जाएगा और उसके बाद महारूद्राभिषेक का आयोजन होगा। आर्ट आफ लिविंग प्रशिक्षक गिरधारी लाल गर्ग ने बताया कि बेंगलुरु से आए पंडित द्वारा ज्योर्तिलिंग की विधिवत रुद्र पूजा एवं वैदिक मंत्रोच्चारण किया जाएगा।
गौरतलब है कि सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजऩी के आक्रमण (1026 ईस्वी) के दौरान खंडित होने पर अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा संरक्षित किए गए शिवलिंग के कुल 11 अंश दक्षिण भारत लाए गए, जिन्हें बाद में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकरजी को सौंपा गया था। रविशंकरजी के प्रयास से यह अंश विभिन्न शहरों में दर्शन के लिए भेजे जा रहे हैं। बताया जाता है कि प्राचीन शिवलिंग चुंबकत्व के कारण हवा में तैरता था और ये अंश उसी के प्रतीक हैं, जो अब भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव करा रहे हैं।
सन् 1924 में दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मण कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य के पास शिवलिंग लेकर गए तो उन्होंने कहा कि 100 साल बाद जब राममंदिर बन जाएगा तो कर्नाटक के बेंगलुरु में ‘शंकर’ नाम के संत को यह सौंप देना। वे ही इनका सही धार्मिक उपयोग करेंगे। यह ज्योतिर्लिंग महमूद गजनी के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण के बाद खंडित हो गया था। इसके 11 अंश अग्निहोत्री परिवार के पास थे, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनका विधिविधान से पूजन कर रहे थे। लगभग 1000 साल बाद अग्निहोत्री परिवार की पीढ़ी ने इन अंशों को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकरजी को सौंपा। इसके बाद श्रीश्री रविशंकर ने करोड़ों हिंदुओं के दर्शन और पूजन के लिए सोमनाथ शिवलिंग भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा 12 राज्यों और 140 शहरों से होकर गुजर रही है।

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