महिलाएं हिन्दुस्तान जिंक के सखी कार्यक्रम से जुड़कर स्वयं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं- मन्नालाल रावत

हिंदुस्तान जिंक जावर माइंस द्वारा सखी उत्सव का आयोजन
3 हजार से अधिक सखियों ने हर्षोल्लास से की भागीदारी
उदयपुर :
महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए जावर के ग्रामीण क्षेत्र में हिन्दुस्तान जिंक द्वारा की जा रही पहल सराहनीय है, यह बात उदयपुर सासंद मन्नालाल रावत ने हिन्दुस्तान जिंक, मंजरी फाउण्डेशन और सखी शक्ति समिति जावर द्वारा जावर स्टेडियम में आयोजित सखी उत्सव में कही। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक केवल एक खनन कार्य करने वाला संस्थान नही, रोजगार का प्रमुख स्रोत है। सखी शब्द ही अपने आप मे सशक्त है। केवल जावर ही नही महिलाओं की वजह से देश सशक्त है। उन्होंने महिलाओं से आव्हान किया वें आय बढ़ाने के लिए कार्य करें। सखी परियोजना से आसपास नारी शक्ति की ताकत बढ़ी है जिससे महिलाओं के सशक्त हुई है यदि महिलाएं आत्मनिर्भर है तो समाज और राष्ट्र मजबूत होगा।
इस अवसर पर वेदांता की हेड सीएसआर अनुपम निधि, पुलिस उपअधीक्षक चांदमल, थानाधिकारी हिम्मत बुनकर, जावर सरपंच प्रकाश मीणा, टिडी सरपंच बंशीलाल मीणा, नेवातलाई से किशन मीणा, सिंघटवाडा सरपंच गौतम मीणा, अमरपुरा से लक्ष्मण मीणा, जावला सरपंच रमेश मीणा जावर मांइस के सौरभ मिश्रा, अमित मालानी, लेडिज क्लब की अध्यक्ष प्रियंका खण्डेलवाल, रश्मि सिंह, मजदूर संघ के सचिव लालूराम मीणा, पुनित बोर्दिया, पद्मलोचन, गजानंद गुप्ता, हितेन्द्र भुप्तावत, सीएसआर हेड विवेक सिंह, भारत सिंह, आस पास के क्षेत्र के विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित थे।


पुलिस महानिरीक्षक गौरव श्रीवास्तव एक महिला को सशक्त किया जाता है तो पूरा परिवार सशक्त होता है, समाज में महिलाओं को सशक्त होना बहुत आवश्यक है,हिन्दुस्तान जिंक के सखी पहल के माध्यम से जो अवसर प्रदान किया गया है उसका बेहतरिन परिणाम इस उत्सव के रूप में सामने है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब वर्तमान में अपने पूर्ण सामथ्र्य और कौशल से आगे बढ़ रही है, घर को चलाने , आय और पालन पोषण में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग कर रही है तो सशक्तिकरण की मिसाल है।


कार्यक्रम में जावर माइंस आईबीयू अंशुल खण्डेलवाल ने कहा कि, हमारे समुदायों में, महिलाएं अपार शक्ति हैं जो कि जो परिवार, कार्यक्षेत्र के बीच सामन्जस्य रखती है। हम अपने सखी समुदाय की प्रत्येक महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सखी, शिक्षा संबल, समाधान और जिंक कौशल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से, हम सभी के लिए एक मजबूत, अधिक समृद्ध भविष्य बनाने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, मुझे विश्वास है कि हम साथ मिलकर एक उल्लेखनीय बदलाव ला सकते हैं। जिंक द्वारा संचालित सखी प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि महिला सशक्तिकरण हेतु कंपनी हमेशा के लिए कटिबद्ध है। उन्होनें कहा कि वेदांता समूह और हिन्दुस्तान जिं़क में महिलाएं उच्च पदों पर कार्य कर रही है एवं माइंस के प्रबंधन में भी लगातार कंधे से कंधा मिला कर कार्य कर रही है।
सुबह से आयोजित सखी उत्सव में रस्सा कस्सी, कबड्ड़ी, बोरा रेस एवं चेयर रेस प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें महिलाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। फिर भजन कीर्तन और राजस्थानी गानो पर नृत्य, महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था। कार्यक्रम का आयोजन सी.एस.आर. कार्यक्रम के तहत् किया गया, जिसमें 3 हजार से अधिक सखी, ग्रामीण महिलाएं, महिला कर्मचारी और जिंक परिवार के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर परिवार, समाज और देश को सशक्त करने का संकल्प लिया। अतिथियों ने खेल प्रतियोगिता प्रतिभागियों और विजेता महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। सखी उत्सव में सखी शक्ति समिति, सखी फेडरेशन की अध्यक्ष रूकमणी मीणा ने परियोजना की वर्ष भर की गतिविधियों की जानकारी दी।
समूह की महिलाओं द्वारा लोक नृत्य और लोकलुभावन सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के साथ ही सीएसआर द्वारा संचालित परियोजनाओं सखी, समाधान, जिंक कौशल शिक्षा संबंल और माइक्रोइंटरप्राइजेज के कार्यो की जानकारी स्टॉल के माध्यम से दी गई। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा 6 जिलों उदयपुर, सलुंबर, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौडगढ़ और उत्तराखंड के पंतनगर में सखी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जावर माइंस क्षेत्र के आस-पास के क्षेत्र में 400 से अधिक महिला स्वयं समूह से जुड़कर 5 हजार से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।
हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा सखी और सूक्ष्म उद्यम कार्यक्रमों के माध्यम से, हिन्दुस्तान जिं़क आर्थिक सशक्तिकरण, उद्यमिता और कौशल निर्माण सहित समावेशी विकास का एक पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित कर रहा है। सखी उत्पादन समिति के अंतर्गत सूक्ष्म उद्यमों ने 14 उत्पादन इकाइयाँ और 208 स्टोर स्थापित किए हैं। खाद्य पदार्थ के दाइची और वस्त्र के उपाया ब्रांड के माध्यम से ग्रामीण बाजारों के साथ मजबूत संबंध स्थापित हुए हैं। लैंगिक समानता, सभ्य कार्य, आर्थिक विकास और असमानताओं को कम करने पर संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप, इस पहल ने 184 से अधिक गाँवों में 203 गाम संगठन 2,1607 स्वयं सहायता समूहों की 25,488 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया है।

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