स्टार्टअप इनिशिएटिव पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा “स्टार्टअप इनिशिएटिव” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्टार्टअप की मूलभूत अवधारणाओं, नवाचार की प्रक्रियाओं तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से अवगत कराना था, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर एवं उद्यमशील बन सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग की निदेशक प्रो. मंजू माण्डोत द्वारा अतिथियों एवं विद्यार्थियों के स्वागत के साथ हुआ। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में स्टार्टअप्स देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने विभाग के बीसीए, एमसीए, एमएससी, पीजीडीसीए में अध्यनरत विद्यार्थियों को नवाचार के प्रति जागरूक रहते हुए अपने विचारों को उद्यम में बदलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. एन. एन. जानी ने अपने उद्बोधन में स्टार्टअप्स की वर्तमान प्रासंगिकता को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स ने भारत में न केवल रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं, बल्कि पारंपरिक व्यवसाय मॉडल में भी परिवर्तन लाकर आर्थिक संरचना को सुदृढ़ किया है। उन्होंने विद्यार्थियों को समस्या-समाधान आधारित सोच विकसित करने और तकनीकी नवाचार के माध्यम से समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. हिरेन जोशी, हेड, डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस, गुजरात यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद ने अपने व्याख्यान में बताया कि भारत विश्व के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग यदि सही दिशा, मार्गदर्शन और संसाधनों का उपयोग करे, तो वह वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। उन्होंने विभिन्न सफल स्टार्टअप्स के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, जोखिम उठाने की क्षमता तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के बीच संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने स्टार्टअप से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस सत्र ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से स्टार्टअप की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने में विशेष सहायता प्रदान की।
इस अवसर पर विभाग के संकाय सदस्य डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. भारत सिंह देवड़ा, डॉ. गौरव गर्ग, डॉ. प्रदीप सिंह शक्तावत, डॉ. भरत सुखवाल, श्री मुकेश नाथ, श्री दुर्गाशंकर, श्री त्रिभुवन सिंह बमनिया एवं श्री चिराग दवे सहित अन्य उपस्थित रहे। सभी संकाय सदस्यों ने विद्यार्थियों के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए उनके विचारों का आदान-प्रदान किया तथा उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुई। इसमें विद्यार्थियों को स्टार्टअप के विभिन्न आयामों, के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नवाचार एवं उद्यमिता के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभाग के सभी संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का सक्रिय योगदान रहा।

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