उदयपुर। वैशाख मास की पावन अक्षय तृतीय के शुभ अवसर पर, मेवाड़ की समृद्ध परंपरा एवं जल-संरक्षण की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए, मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ की गरिमामयी उपस्थिति में शिकारबाड़ी परिसर में ‘अरविन्द सरोवरम्’ का सृजन किया गया। यह पुण्य कर्म मेवाड़नाथ प्रभु एकलिंगनाथ जी के आशीर्वाद से मेवाड़ के प्रकाण्ड पण्डितों एवं विद्वजनों के सान्निध्य में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस पावन माह में जल के महत्व को केंद्र में रखते हुए, गोलोकवासी पूजनीय 76वें श्री एकलिंग दीवान श्रीजी हुजूर अरविन्दसिंहजी मेवाड़ की पुण्य स्मृति को चिरस्थायी एवं कालजयी बनाने हेतु प्रकृति और पंचतत्वों पर आधारित विशेष श्रद्धानुष्ठान का आयोजन किया गया। ‘अरविन्द सरोवरम्’ इसी भावनात्मक एवं आध्यात्मिक संकल्प का प्रतीक है।
मेवाड़ की ऐतिहासिक परंपरा में जलस्थापत्य का विशेष स्थान रहा है। महाराणाओं ने सरोवर, कूप, कुण्ड और बावड़ियों के निर्माण एवं उनके संरक्षण में अविस्मरणीय योगदान दिया है। यह परंपरा केवल स्थापत्य तक ही नहीं, बल्कि शाश्वत धर्म के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जाती रही है।
मेवाड़ ने सदैव जल-संरक्षण और भविष्य के लिए जल-संचय का आदर्श प्रस्तुत किया है। विभिन्न जलस्रोतों के पारस्परिक संयोजन की अनूठी प्रणाली के माध्यम से मेवाड़ ने विश्व के समक्ष एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित किया है।
‘अरविन्द सरोवरम्’ का यह सृजन न केवल एक श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति संरक्षण एवं जल-संवर्धन का संदेश भी है।

