उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ में आयोजित “अपनों से अपनी बात” कार्यक्रम का समापन संवेदनाओं, प्रेरणा और आत्मविश्वास के भावपूर्ण वातावरण में हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांग बंधुओं एवं उनके परिजनों से संवाद करते हुए संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि जीवन की राह चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, निरंतर प्रयास करने वाला व्यक्ति अंततः अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है। निरंतरता ही सफलता की वास्तविक कुंजी है।
उन्होंने कहा कि संघर्ष जीवन का स्वाभाविक अध्याय है, लेकिन जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना सीख लेता है, वही समाज के लिए प्रेरणा बनता है। दिव्यांग भाई-बहनों की जीवटता और आत्मबल हम सभी को यह संदेश देता है कि हौसलों के आगे सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं।
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान केवल सेवा का केंद्र नहीं, बल्कि उन सपनों का आंगन है जहां निराश आंखों में फिर से उम्मीद जगाई जाती है। यहां उपचार के साथ आत्मविश्वास, कृत्रिम अंगों के साथ आत्मसम्मान और सहयोग के साथ अपनत्व भी दिया जाता है।
कार्यक्रम में कई दिव्यांगजनों ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए बताया कि संस्थान से मिले नारायण लिम्ब, उपचार और पुनर्वास सेवाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी। किसी ने इसे “नई जिंदगी” कहा तो किसी ने “टूटे सपनों को फिर से उड़ान” मिलने की अनुभूति व्यक्त की।
समापन अवसर पर प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को भावुक और प्रेरणादायी बना दिया। पूरा सेवा महातीर्थ मानो इस संदेश से गूंज उठा कि जब संकल्प मजबूत हो, तो जीवन की हर बाधा को पार किया जा सके ।

