कैनो मैराथन वर्ल्ड कप’ हेतु उदयपुर के प्रतिभावान खिलाड़ियों का सहयोग

पूर्वजों की परम्परा का अनुसरण करते हुए मानव धर्म के पालन हेतु सदैव तत्पर रहूंगा -डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़
उदयपुर।
महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने ‘कैनो मैराथन वर्ल्ड कप 2026’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे उदयपुर मेवाड़ के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। फाउण्डेशन की ओर से प्रदान की गई यह सहयोग राशि चीन के बाझोंग शहर में 21 से 24 मई तक आयोजित होने वाली इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी हेतु दी गई है। प्रतियोगिता का आयोजन अंतरराष्ट्रीय कैनो फेडरेशन एवं चीन कयाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय टीम का चयन चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय चयन ट्रायल्स के माध्यम से किया गया, जिसमें देशभर के लगभग 300 श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने भाग लिया। कठोर प्रतिस्पर्धा के पश्चात चयनकर्ताओं द्वारा उदयपुर के प्रतिभावान खिलाड़ी सुश्री कनिष्का कुमावत एवं श्री आयुष चौधरी का चयन भारतीय दल में किया गया। ये दोनों खिलाड़ी इस मेगा प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दोनों खिलाड़ियों ने अपने अभिभावकों सहित डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से भेंट कर 5 लाख रुपये की सहयोग राशि के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही पूर्व में फाउण्डेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई अंतरराष्ट्रीय स्तर की 12 नौकाओं हेतु भी धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इस सहयोग को संजीवनी बूटी बताया। इन अत्याधुनिक नौकाओं एवं फतहसागर झील में नियमित एवं कठोर अभ्यास के माध्यम से दोनों खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है और अब वे विश्व मंच पर उदयपुर एवं देश का गौरव बढ़ाने जा रहे हैं।
डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मेवाड़ की प्रतिभाएं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, जो सम्पूर्ण क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों खिलाड़ी प्रतियोगिता में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करेंगे। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी ऐसी उभरती प्रतिभाओं को हरसंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई और जल्द ही खिलाडियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की 8 नई नौकाएं भेंट करने का वादा करते हुए, इसे पूर्वजों द्वारा आरम्भ की गई मेवाड़ की सदियों पुरानी दायित्व निर्वहन की परम्परा बताया।

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