निर्मल मन से की गई तपस्या ही सच्ची साधना : प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान की ओर से सावन मास में आयोजित शिव कथा में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भगवान शिव और मां सती के दिव्य मिलन की कथा सुनाते हुए कहा कि सच्ची तपस्या वही कर सकता है, जिसका मन निर्मल और भाव पवित्र हों। उन्होंने कहा कि तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं, बल्कि मन को विकारों से मुक्त कर ईश्वर के प्रति समर्पित करना है।
कथा प्रसंग में उन्होंने मां सती की साधना और भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का वर्णन किया। कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में त्याग और वैराग्य को आत्मशुद्धि का मार्ग माना गया है। आज भी कलियुग में जैन धर्म सहित विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं में अनेक युवक-युवतियां सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम और वैराग्य का मार्ग अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक वैराग्य बाहरी स्वरूप में नहीं, बल्कि मन के भीतर जन्म लेता है।
अग्रवाल ने कहा कि भगवान शिव का जीवन त्याग, करुणा, संयम और समभाव का संदेश देता है। यदि मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, लोभ, क्रोध और मोह पर विजय प्राप्त कर ले तो उसका जीवन ही साधना बन जाएगा।
कथा के दौरान भजनों और शिव स्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। नारायण सेवा संस्थान से लाभान्वित दिव्यांग भी भजनों पर झूमते रहे। उनके परिजनों ने बड़ी संख्या में कथा का श्रवण किया। कथा स्थल पर शिव भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने कथा के दौरान जयकारे लगाए।

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