गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में फेफड़ों के कैंसर की सर्जरी पर जागरूकता सत्र

उदयपुर। गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में हाल ही में फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों एवं इसकी आधुनिक सर्जरी विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आशीष जाखेटिया ने चिकित्सकों, मेडिकल विद्यार्थियों एवं आमजन को फेफड़ों के कैंसर की समय पर पहचान, जांच और सर्जरी की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

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डॉ. जाखेटिया ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण धूम्रपान के अलावा वायु प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, औद्योगिक प्रदूषकों का संपर्क तथा कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में पता चल जाए तो सर्जरी इसके उपचार का सबसे प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।

उन्होंने बताया कि सर्जरी से पहले मरीज की विस्तृत जांच की जाती है, जिसमें सीटी स्कैन, पीईटी-सीटी, बायोप्सी, ईबीयूएस (EBUS–Endobronchial Ultrasound), पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (PFT) सहित अन्य आवश्यक जांचें शामिल होती हैं। इन जांचों के आधार पर कैंसर की स्टेज का आकलन किया जाता है तथा यह तय किया जाता है कि मरीज सर्जरी के लिए उपयुक्त है या नहीं।

उन्होंने बताया कि ट्यूमर के आकार और स्थान के अनुसार वेज रिसेक्शन, लोबेक्टॉमी तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यूमोनेक्टॉमी जैसी सर्जरी की जाती हैं। वर्तमान में वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) जैसी आधुनिक तकनीक के माध्यम से छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किए जाते हैं, जिससे मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र रिकवरी का लाभ मिलता है।

डॉ. जाखेटिया ने कहा कि लगातार खांसी, खून के साथ खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या बिना कारण वजन कम होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही सर्जरी और उचित उपचार के माध्यम से फेफड़ों के कैंसर का सफल प्रबंधन संभव है। उन्होंने धूम्रपान से दूर रहने तथा शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेने की अपील की।