कठोर तपस्या से शिव को पाया, पार्वती बनीं अपर्णा, डोला इंद्र का सिंहासन

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में सावन मास के पावन अवसर पर चल रही ‘अपनों से अपनी बात—भोलेनाथ के साथ’ शिव कथा में रविवार को संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की प्रेरणादायी कथा सुनाई।
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के संकल्प के साथ माता पार्वती ने राजसुख का त्याग कर कठोर तपस्या की। उन्होंने कंद-मूल का आहार लिया और बाद में केवल पत्तों का सेवन किया। इसी कारण उन्हें ‘अपर्णा’ नाम मिला। उनकी तपस्या इतनी प्रभावशाली थी कि प्रकृति भी मानो साधना के सामने नतमस्तक हो गई। हिंसक जीवों ने अपनी शत्रुता भुला दी, सूर्य का ताप मंद पड़ गया और नदियों की गति तक थमने लगी।
उन्होंने कहा कि पार्वती की तपस्या के प्रभाव से तीनों लोकों में हलचल मच गई और देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। चिंतित देवता ब्रह्माजी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने बताया कि तपस्या करने वाली यह विदुषी कन्या स्वयं पार्वती हैं और उनका शिव से विवाह ही देवताओं की चिंता का समाधान करेगा। देवताओं की सबसे बड़ी चिंता तारकासुर के अत्याचार को लेकर थी।
प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि इसके बाद सप्तऋषियों ने भी पार्वती की दृढ़ता और संकल्प की परीक्षा ली। यहां तक कि स्वयं महादेव ने वृद्ध का वेश धारण कर पार्वती की परीक्षा ली और शिव के प्रति उनके समर्पण को परखा। पार्वती अपने संकल्प से तनिक भी विचलित नहीं हुईं। अंततः उनकी कठोर तपस्या, अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प सफल हुआ और शिव-शक्ति का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद गणेश जी महाराज व कार्तिकेय की कथा सुनाई। तारकासुर का वध हुआ। कथा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु और दिव्यांगजन बधू मौजूद रहे।