प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प से रूबरू हुए विद्यार्थी
उदयपुर : महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल, सिटी पैलेस, उदयपुर के 70 विद्यार्थियों ने 27 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक कश्मीर का नौ दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। विद्यालय के मानद निदेशक श्री सतीश कुमार शर्मा के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस शैक्षणिक यात्रा में छह शिक्षक एवं एक सहायक कर्मचारी भी सम्मिलित रहे।
इस भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को कश्मीर की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों एवं पारंपरिक हस्तशिल्प से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना तथा उन्हें पुस्तकीय ज्ञान से परे अनुभवात्मक शिक्षा प्रदान करना था।
यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने श्रीनगर की विश्वप्रसिद्ध डल झील में शिकारा की सवारी का आनंद लिया। इसके अतिरिक्त शंकराचार्य मंदिर, चश्मे शाही, निशात बाग एवं लाल चौक का भ्रमण कर कश्मीर की आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को नजदीक से समझा। इन स्थलों ने विद्यार्थियों को कश्मीर के गौरवशाली इतिहास और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराया।

हिमालय की मनोरम वादियों में सोनमर्ग एवं प्रसिद्ध जोजिला दर्रे के प्राकृतिक दृश्यों ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। गुलमर्ग में विश्वप्रसिद्ध गोंडोला के माध्यम से कोंगडोरी की ऊँचाइयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों ने बर्फ से आच्छादित पर्वतीय क्षेत्र का रोमांचक अनुभव प्राप्त किया। वहीं पहलगाम के चंदनवाड़ी एवं बेताब घाटी की अनुपम प्राकृतिक छटा ने सभी का मन मोह लिया। सोनमर्ग में बर्फ के बीच खेलना विद्यार्थियों के लिए यात्रा के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने पोनी राइड, जिपलाइनिंग तथा सेब के बागों का भ्रमण कर कश्मीर के प्राकृतिक एवं स्थानीय जीवन का आनंद लिया।
इस शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष पारंपरिक कश्मीरी हस्तशिल्प इकाई का भ्रमण रहा। यहाँ विद्यार्थियों ने स्थानीय कारीगरों द्वारा वस्त्रों पर की जाने वाली बारीक कढ़ाई तथा पारंपरिक कालीन निर्माण की जटिल, कलात्मक एवं श्रमसाध्य प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा। इस अनुभव के माध्यम से उन्हें कश्मीर की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपराओं, कारीगरों के कौशल एवं स्थानीय कला-संस्कृति के संरक्षण के महत्व की जानकारी मिली।
इस भ्रमण में शिक्षकों के रूप में श्रीमती मंशा सपरा, श्रीमती कविता जैन, सुश्री पारुल मेहता, श्रीमती श्वेता सुखवाल, श्री सिद्धार्थ सिंह राठौड़ एवं श्री धवल माली ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। श्री तुलसीराम डांगी ने सहायक कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।
इस नौ दिवसीय शैक्षणिक यात्रा ने विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष की सीमाओं से बाहर निकलकर प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से सीखने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान किया। प्राकृतिक भूगोल, इतिहास, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विविधता एवं पारंपरिक शिल्प का यह अनूठा संगम विद्यार्थियों के ज्ञान, दृष्टिकोण और अनुभवों को समृद्ध करने वाला सिद्ध हुआ।
कश्मीर की मनमोहक वादियों, हिमालय की भव्यता, स्थानीय लोगों की कला-कौशल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी स्मृतियाँ विद्यार्थियों के लिए न केवल अविस्मरणीय रहेंगी, बल्कि उनके शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
