चित्तौड़गढ़ (मुकेश मूंदड़ा )। चित्तौड़ प्रान्त के तत्वावधान में आयोजित बजरंग दल के 7 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के द्वितीय दिवस पर विभिन्न शारीरिक एवं बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित युवाओं ने उत्साह एवं अनुशासन के साथ सहभागिता निभाई। दिवस की शुरुआत प्रातः कालीन स्मरण एवं आचार पद्धति, व्यायाम, योग एवं शारीरिक अभ्यासों से हुई। इसके पश्चात प्रशिक्षणार्थियों को समता, समूह आधारित गतिविधियों एवं संगठनात्मक कार्य पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया। चर्चा सत्र में अखिल भारतीय समरसता प्रमुख एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता देव जी भाई ने सामाजिक समरसता एवं जीवन व्यवहार विषय पर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने गुरु नानक देव, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं महात्मा गांधी के उदाहरणों के माध्यम से समाज में समरसता, समानता एवं सद्भाव के महत्व को समझाया। बौद्धिक सत्र में देव जी भाई ने धर्मांतरण विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय एवं गरीब क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन, आर्थिक सहायता एवं अन्य माध्यमों का उपयोग कर धर्म परिवर्तन कराने के प्रयास किए जाते हैं, जिससे समाज में विघटन एवं सांस्कृतिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती है। साथ ही उन्होंने तथाकथित लव जिहाद विषय पर भी चर्चा करते हुए युवाओं को सामाजिक जागरूकता, सतर्कता एवं संस्कारयुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, परंपराएं एवं संस्कार ही समाज की वास्तविक पहचान हैं। युवाओं को अपनी संस्कृति एवं इतिहास के प्रति जागरूक रहकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। साथ ही हिन्दू समाज की घटती संख्या एवं सामाजिक चुनौतियों पर चिंतन करते हुए समाज को संगठित रहने का संदेश दिया। शिविर के दौरान प्रशिक्षणार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला तथा सभी ने अनुशासन एवं समर्पण के साथ गतिविधियों में भाग लिया। आगामी दिनों में भी विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही प्रान्त सह संयोजक एवं वर्ग प्रमुख करण सिंह ने बजरंग दल के ध्येय वाक्य सेवा, सुरक्षा और संस्कार के अंतर्गत आयोजित आपदा प्रबंधन सत्र में शिक्षार्थियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से निपटने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य संयम, सतर्कता और त्वरित प्रबंधन होता है। उन्होंने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार पूरे समाज ने अनुशासन, सेवाभाव एवं सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने शिक्षार्थियों को प्राथमिक उपचार, घायलों की सहायता, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था, रक्तदान, राहत सामग्री वितरण एवं बचाव कार्यों में स्वयंसेवकों की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही बताया कि आपदा के समय समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए पीड़ितों की सहायता करनी चाहिए।

