2035 तक भारत का अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन होगा : डॉ. निलेश एम देसाई

  • भारत का जीपीएस सिस्टम नाविक जल्द ही काम करेगा, मोबाइल की जगह डिवाइस लेगी
    उदयपुर।
    2035 तक भारत का अपना भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन होगा जिसके लिए प्रयास शुरु हो चुके हैं। अगले कुछ सालों में भारत का स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक भी होगा जो भारत का खुद का जीपीएस सिस्टम होगा। यह जानकारी स्पेस एप्लीकेशंस सेन्टर, इसरो अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉ. निलेश एम देसाई ने अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरड़ा, उदयपुर में पत्रकारवार्ता में दी। डॉ. देसाई ने स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक के बारे में बताया कि इस पर कई सालों से काम चल रहा है, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों से इसमें अभी भी इसरो के इंजीनियर काम कर रहे हैं। अगले एक-डेढ़ साल में नाविक काम करने लगेगा जिसके बाद देश के नागरिकों के साथ देश की सेना को भी इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक जवान के लापता होने पर तलाशना मुश्किल हो जाता है, लेकिन नाविक के काम करने के बाद यह असंभव नहीं रहेगा। जवान की कलई में घड़ी की तरह डिवाइस लगेगी जो उसकी हर एक लोकेशन के बारे में जानकारी देगी। भारत का यह अपना सिस्टम होने से किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
    डॉ देसाई ने कहा कि अंतर्राष्टीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना में भारत का सहयोग नहीं था, उसमें पांच छह अन्य देश शामिल थे लेकिन अब भारत खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की ओर से कदम बढ़ा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा केे अनुसार तथा इसरो द्वारा तय किए गए प्रोग्राम के मुताबिक 2035 तक इसका लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2028 से 2035 तक इसके पांच माड्यूल होंगे जिसके प्रथम चरण के माड्यूल की करीब 22 हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। प्रथम चरण में मुख्य मिशन गगनयान की लॉन्चिंग के साथ अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना का लक्ष्य है जिसके लिए यह बजट निर्धारित किया गया है। गगनयान के तीन मिशन मानवरहित होंगे जिसमें विभिन्न प्रकार के परीक्षण होंगे और उसकी सफलता के पश्चात दो मिशन मानव सहित होंगे। डॉ देसाई ने बताया कि चंद्रयान-4 सन् 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है जिसके लिए तैयारी चल रही है। भारत 2025 से 2040 तक 103 सेटेलाइट लॉन्च करेगा जिनमें 40 से 45 ऐसे हैं जिन पर वर्तमान में काम चल रहा है तथा बाकि समय की जरुरत के अनुसार नए होंगे। यह सारे सेटेलाइट इसरो ही लॉन्च करेगा ऐसा नहीं है, बल्कि इनमें प्राइवेट सेक्टर की भी मदद ली जाएगी।
    डॉ. देसाई ने बताया कि वर्तमान में जो मोबाइल चल रहे हैं वे डायरेक्ट टू डिवाइस आधारित है। अगले कुछ सालों में इसकी जगह ऐसी डिवाइस ले लेगी जो छोटी होगी, वजन में कम होगी, बार-बार चार्जिंग की जरुरत नहीं रहेगी और जिससे दुनिया के किसी भी कोने से बात हो सकेगी। इसके लिए एक सेटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं और अगले पांच सालों में यह संभव पाएगा ऐसा प्रयास किया जा रहा है। अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ चुका है और संभव है कि कुछ समय में अमेरिका में ऐसी डिवाइस ऑपरेशनल हो जाएगी।
    इससे पूर्व अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीजर के प्रांगण में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की शानदार उपलब्धियों को प्रदर्शित करने हेतु एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में रॉकेट लॉन्च वाहनों के मॉडल (जैसे पीएसएलवी व जीएसएलवी, प्रसिद्ध उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की प्रतिकृतियां (जैसे चंद्रयान, मंगलयान), अंतरिक्ष में भारत की यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी तथा छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

Related posts:

महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन का 41वाँ वार्षिक विद्यार्थी सम्मान समारोह

मातृ शक्ति के सम्मान से समृद्धिः अग्रवाल

विश्व पुस्तक मेले में 'प्रेमचंद की व्यंग्य कथाएं' पुस्तक का लोकार्पण

पेसिफिक क्रिकेट कप टूर्नामेंट 2025 संपन्न

लक्ष्मी मिष्ठान भंडार के नए शोरूम का शुभारंभ

नारायण सेवा संस्थान के 43वें नि:शुल्क सामूहिक विवाह में दिव्यांगता का अधूरापन मिटेगा, गृहस्थ बंधन से...

धरोहर संस्थान और केंद्रीय संस्कृति विश्वविद्यालय के बीच अनुबंध

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा

राजमहल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ की डेढ़ घंटे मुलाकात

प्रो भाणावत सुविवि के छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवम स्पोर्ट्स बोर्ड के चेयरमैन बने

अशोक गहलोत का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने देवराज के परिवार से की मुलाक़ात, बँधाया ढाढ़स