उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में सावन मास के पावन अवसर पर आयोजित शिव भक्ति कथा में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने महाराज सगर, भगीरथ की तपस्या और मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की मार्मिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगीरथ का जीवन धैर्य, संकल्प और लोककल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की प्रेरणादायी मिसाल है। आज का मानव भी यदि अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानवता के कल्याण का संकल्प ले, तो अनेक असंभव कार्य संभव हो सकते हैं।

प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि महाराज सगर के वंशजों के उद्धार के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या की। उनकी साधना और दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ। गंगा के प्रचंड वेग को धारण करने के लिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में उन्हें स्थान दिया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्य के लिए धैर्य, तपस्या और सही मार्गदर्शन आवश्यक है।
उन्होंने भगवान शिव से लोक सेवा और विश्व कल्याण के लिए विवेक एवं वरदान मांगने के प्रसंग को वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए कहा कि समाज को आज ऐसे विवेक की आवश्यकता है, जो व्यक्ति को सही और गलत का निर्णय करने के साथ दूसरों के सुख-दुःख को समझने की प्रेरणा दे। सेवा तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना, समर्पण और परोपकार की भावना हो।
कथा के दौरान प्रशांत अग्रवाल ने संस्थान में उपचार एवं सेवा प्राप्त कर रहे दिव्यांगजनों से ‘अपनों से अपनी बात’ संवाद किया। उन्होंने लाभान्वित दिव्यांगों और उनके परिजनों से सेवाओं के अनुभव जाने तथा बेहतर सेवा के लिए सुझाव भी लिए। दिव्यांगजनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए संस्थान की सेवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने शिव भक्ति में सहभागिता कर लोकसेवा और मानव कल्याण का संकल्प लिया।
