उदयपुर : भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर द्वारा स्वच्छता एक्शन प्लान – विशेष अभियान 6.0 का शुभारंभ एक विशेष कार्यक्रम के साथ किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1, प्रतापनगर, उदयपुर के 65 विद्यार्थियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के वैज्ञानिक एवं अन्य स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध विद्वान डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने “मेवाड़ की पर्यावरण संरक्षण की परम्पराएँ : दक्षिणी राजस्थान में” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने उदयपुर की अरावली पर्वतमाला, पर्यावरण एवं जल संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिछोला झील से उदयसागर तक जल के प्रवाह एवं जलमार्गों के निर्माण तथा क्षेत्र में विकसित पारंपरिक जल प्रबंधन व्यवस्था का उल्लेख किया।

डॉ. जुगनू ने पर्यावरण एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महिलाओं और बेटियों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने प्राचीन समय से मंदिरों के निर्माण तथा उनके समीप बावड़ी/जल संरचनाओं के निर्माण की परम्परा का उल्लेख करते हुए पाटन की रानी की वाव का संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि ‘बा’ का अर्थ बावड़ी से जुड़ा है। व्याख्यान में उन्होंने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार के उदाहरण भी दिए, जैसे यूज़-एंड-थ्रो पेन की तुलना में स्याही वाले पेन का उपयोग।
उन्होंने पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रथाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि विवाह संस्कारों के प्रारंभिक अनुष्ठानों में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है तथा ‘रोड़ी’ जैसे जैविक/प्राकृतिक पदार्थों के पूजन का संदर्भ दिया। इसी प्रकार, उन्होंने सब्जियों के संरक्षण की पारंपरिक विधि के रूप में अचार बनाने की परम्परा का उल्लेख किया।
व्याख्यान के दौरान पारंपरिक झाड़ू, जिसे ‘सोहनी’ कहा जाता है, के संदर्भ में उन्होंने स्वच्छता की भावना को रेखांकित करते हुए “सोने जैसा साफ”की भावना से इसे जोड़ा। कार्यक्रम में “साफ-सुथरी संस्कृति का संकल्प”का संदेश भी दिया गया, जो स्वच्छता के साथ-साथ स्थानीय परम्पराओं, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की भावना को अभिव्यक्त करता है।
व्याख्यान के उपरांत विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने जोनल एंथ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम, पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर का भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने संग्रहालय में प्रदर्शित विभिन्न नृजातीय वस्तुओं, पारंपरिक जीवन-शैली एवं सांस्कृतिक विरासतसे संबंधित सामग्री का अवलोकन किया तथा भारतीय समाज की विविध सांस्कृतिक परम्पराओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।
