उदयपुर : बढ़ते स्क्रीन टाइम से परिजनों को नेगलेक्ट करने की प्रवृत्ति कभी-कभी परिजनों की मौत के रूप में प्रकट हो जाती है, जैसा इस नाटिका में दादी की मौत के रूप में दर्शाया गया है। दोनों पोते पोती अपने ही स्क्रीन टाइम और डांस में खोए हुए होते हैं और दादी के छाती के दर्द की पुकार को अनसुना कर देते हैं और दादी मर जाती है। तब अपने स्क्रीन टाइम में खोए पोते पोती को दादी की मौत पर पछतावा होता है कि काश हम स्क्रीन टाइम में इतना न खोया होते तो दादी बच जाती ? डॉ पी सी जैन द्वारा रचित इस नाटिका को पेसिफिक इंस्टियूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, उमरड़ा, उदयपुर में शनिवार को नव आगंतुक छात्र-छात्राओं के समक्ष प्रदर्शित किया गया।
नव आगंतुक 250 छात्र-छात्राओं के इंडक्शन प्रोग्राम जल मित्र डॉ पी सी जैन और छात्रों द्वारा जल पूजन और जल आरती से प्रारंभ किया गया। “आज नहीं तो कल जाएगा, जल बिन जीवन जल जाएगा” लघु फिल्म छात्रों को दिखाते हुए डॉक्टर पी सी जैन ने कहा कि अभी से प्रतिदिन जल बचाना हमारी आदतों में होना चाहिए तथा वर्षा काल में रूफ टॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग कर भूजल का पुनर्भरण करना चाहिए अन्यथा “जल बिन जीवन जल जाएगा” यह कथन सत्य हो जाएगा। छात्रों द्वारा ले गए पानी का अपने टीडीएस मीटर द्वारा जांच कर उन्हें बताया कि पीने योग्य जल का टीडीएस कितना होना चाहिए।
अगले प्रेजेंटेशन में उन्होंने “फैक्ट फाइल” दिखाते हुए बताया कि देश में 37 करोड लोग किसी न किसी प्रकार का नशा करते हैं और यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। भावी चिकित्सकों को तंबाकू, शराब, अफीम, ब्राउन शुगर, गांजा, गुटखा इत्यादि से होने वाले नुकसान और उनका इलाज की जानकारी होनी चाहिए, तथा स्वयं भी किसी प्रकार के नशो को नहीं करना चाहिए। उन्होंने भावी चिकित्सकों से पूछा कि आपका मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होने पर खुशी के आंसू किसके आए? इस पर सभी ने कहा कि हमारे माता-पिता के। डॉ. पीसी जैन ने पूछा कि अगर आप किसी तरह के नशे की गिरफ्त में आ जाओगे तो सबसे ज्यादा दुख के आंसू किसे आएंगे? सबने कहा, माता-पिता को। तो क्या आप ऐसा चाहोगे? सभी ने कहा “नही”, । क्या आप अपना जीवन साथी ऐसा चाहोगे जो नशा करता हो , करती हो ? सभी ने कर दिया।
इसके बाद उन्होंने अपनी पीपीटी में युवक और युवती के नशा करने के अंतर बताते हुए कहा कि सब्सटेंस एब्यूज (नशा), युवतियों में उनकी शारीरिक बनावट, हार्मोनल अंतर के कारण अधिक घातक है, साथ ही होने वाली संतान में विकृतियां पैदा करती है जो कोई भी मां नहीं चाहेगी। प्रारम्भ में स्वागत डॉ. श्रीनिधि ने किया। प्रिंसिपल डॉ. सुरेश गोयल ने इस तरह के कार्यक्रम हर 6 माह में करने का आग्रह किया। धन्यवाद डॉ. प्रणव कुमार ने ज्ञापित किया। संचालन सोनाली कुकरेजा ने किया। नाटिका में मनीषीका, अमीश, अंकुर, आर्यन, कशिश, हर्षिता, जिया, साक्षी ने भाग लिया।
पेसिफिक इंस्टियूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, उमरड़ा में नव आगंतुक छात्र-छात्राओं के समक्ष नाटिका प्रदर्शित
