उदयपुर। कहते हैं कि अगर लगन सच्ची हो तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। उदयपुर की संतोष डाभी इसकी मिसाल हैं। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के कला के क्षेत्र में 45 वर्षों का लंबा और प्रेरणादायक सफर तय किया है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच भी उन्होंने अपनी कला साधना को कभी नहीं छोड़ा। आज उनकी मेहनत और जुनून ने उन्हें न सिर्फ शहर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।
हाल ही में उनकी कला यात्रा को एक नया मुकाम तब मिला, जब उन्होंने मेवाड़ राजघराने को समर्पित अपनी एक विशेष पेंटिंग डॉ. लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ को भेंट की। पेंटिंग को देखकर लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने उनकी कला, समर्पण और रचनात्मक सोच की सराहना की। यह मुलाकात और सम्मान संतोष डाभी के लिए यादगार पल बन गया।
संतोष डाभी ने कला की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन बचपन से ही उन्हें चित्रकला और रचनात्मक कार्यों में रुचि थी। यही रुचि धीरे-धीरे उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी कला को निखारा और आज उसी प्रतिभा के दम पर कई मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं।
संतोष डाभी की उपलब्धियों का दायरा काफी बड़ा है। उन्हें उदयपुर रत्न सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उनका नाम चार बार इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। वहीं उनकी उपलब्धियों को विमेन इंटरनेशनल वर्ल्ड रिकॉर्ड और इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिल चुकी है। यह सम्मान उनकी वर्षों की मेहनत, समर्पण और कला के प्रति जुनून का परिणाम हैं।
कला के साथ-साथ संतोष डाभी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने 25 वर्षों तक विद्यालय में अध्यापन कार्य किया और विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रचनात्मकता की प्रेरणा भी दी।

