फायर सेफ्टी एवं रोकथाम रणनीतियों पर तकनीकी वार्ता आयोजित

उदयपुर : दि इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया उदयपुर लोकल सेंटर द्वारा फायर सेफ्टी एवं रोकथाम रणनीतियों विषय पर तकनिकी वार्ता आयोजित का आयोजन किया गया।
प्रारम्भ में संस्था अध्यक्ष इंजी पुरुषोत्तम पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन व तकनीकी विशेषज्ञों को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा आग लगने की घटनाओं को रोकने हेतु नवीनतम उपायों की जानकारी देना है। उन्होंने आग लगने के कारणों उससे बचाव की रणनीतियों अग्निशमन उपकरणों के सही उपयोग तथा आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।
मानद सचिव इंजीनियर पीयूष जावेरिया ने आग से संबंधित दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण, उससे बचाव के उपाय तथा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्परता से कार्रवाई करने की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। इस प्रकार की जनहितकारी तकनीकी वार्ताओं के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उचित प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से बड़े हादसों को टाला जा सकता है।
मुख्य अतिथि आदर्श इंजीटेक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक इंजी शांतिलाल जैन ने कोविड काल में ऑक्सीजन सप्लाई के संस्मरण और अपनी फैक्टरी में हुए अग्निकांड को सुनाते हुए बताया कि वे बिना पैनिक हुए इसकी सूचना फायर ब्रिगेड और संबंधित पुलिस थाने को दी। उन्होंने बताया कि यदि इस तरह के विकराल अग्निकांड होते हैं तो संयम रखकर फायर ब्रिगेड और संबंधित पुलिस थाने को सूचना देनी चाहिए।
वक्ता विश्वेश्वरैया कम्युनिटी कॉलेज के प्रधानाचार्य इंजी अभिषेक देवलिया ने बताया कि वैश्विक स्तर पर आग से संबंधित घटनाओं में हर साल लगभग 1,80,000 लोगों की जान जाती है और अरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान होता है। भारत में आग लगने की घटनाओं से हर साल लगभग 25000 लोगों की मौत होती है और अनुमानित आर्थिक नुकसान 1000 करोड़ प्रति वर्ष होता है। अमेरिका में औद्योगिक और विनिर्माण संपत्तियों में हर साल औसतन 36784 आग लगती हैं जिसके परिणामस्वरूप 22 नागरिकों की मौत होती है और 211 नागरिक घायल होते हैं और करीब 1.5 अरब डॉलर की प्रत्यक्ष संपत्ति का नुकसान होता है जिसका मुख्य कारण उपकरणों की खराबी, बिजली की खराबी और खराब हाउसकीपिंग प्रमुख स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि आग दरअसल एक रासायनिक अभिक्रिया है जो कुछ पदार्थों, खासकर ईंधन (चाहे वह ठोस हो, तरल हो या गैसीय), ऊष्मा या एक निश्चित तापमान और ऑक्सीजन के एक निश्चित अनुपात के मिश्रण से उत्पन्न होती है जिसके परिणामस्वरूप प्रकाश, ऊष्मा और धुआं उत्पन्न होता है। हमें नियमित उपकरण रखरखाव और निरीक्षण, ज्वलनशील पदार्थों का सुरक्षित भंडारण, ज्वलनरोधी उपकरणों का उपयोग, उचित अपशिष्ट निपटान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हर बड़ी आग पहले एक छोटी सी आग के रूप में शुरू होती है। आग को उसकी प्रारंभिक अवस्था में ही बुझाना ज़्यादा प्रभावी होता है इसके लिए अग्निशामक यंत्र एक बहुत ही उपयोगी उपकरण है। पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र छोटे और हल्के होते हैं इसलिए इन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और आग बुझाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आग लगने की स्थिति में तुरंत अलार्म बजाना चाहिए तुरंत दूसरों को सूचित करना चाहिए और फायर अलार्म चालू करना चाहिये। अग्निशमन विभाग को कॉल करना चाहिये। सुरक्षित रूप से बाहर निकलें निकटतम निकास मार्गों का उपयोग करें और आग लगने पर लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए।
वक्ता आरएनटी मेडिकल कॉलेज में कंसल्टेंट प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ विकास चौधरी ने अग्नि सुरक्षा और पुनर्वास पर बताया कि इस वार्ता का उद्देश्य आग से होने वाली मौतों, चोटों और उनके सामान्य कारणों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने आग के विभिन्न प्रकार को इंगित करते हुए बताया कि लकड़ी, कागज़ या कपड़ों जैसी ठोस सामग्री से जुड़ी आग, ज्वलनशील तरल पदार्थों जैसे पैराफिन, पेट्रोल, डीजल या तेल (लेकिन खाना पकाने के तेल नहीं) के कारण लगी आग, ज्वलनशील गैसों जैसे ब्यूटेन, प्रोपेन या मीथेन के कारण लगी आग, जलती हुई धातुओं, जैसे एल्युमीनियम, लिथियम या मैग्नीशियम के कारण होने वाली आग, बिजली से लगने वाली आग। उन्होंने घर में रसोई में बच्चों की पहुँच से गर्म वस्तुओं को दूर रखकर, बिजली से जलने से बचने के लिए तारों को दूर रखें और आउटलेट को ढक दें। गर्म वस्तुओं को ठंडा होने का समय देकर, बिजली से जलने से बचा जा सकता है। प्राथमिक उपचार पर बताया कि जलने पर उस अंग को कम से कम 10 मिनट तक बहते पानी के नीचे ठंडा करें। जले हुए स्थान को एक जीवाणु रहित चिपकने वाली पट्टी से सुरक्षित रखें, मक्खन या मलहम न लगाएँ क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है, छालों को न फोड़ें, अगर वे फूट जाएँ तो उस जगह को धीरे से साफ़ करें, दर्द निवारक दवा लें अगर जलन गंभीर है, तो ब्लड फॉर श्योर हेल्पलाइन नंबर 080 67335555 पर कॉल करें। इस अवसर पर हाल ही में आयोजित 730 परषिद् बैठक की सफलता पर इसमें शामिल सदस्यों का सम्मान तथा तीसरे अंक का विमोचन किया गया।
इंजी पीयूष जावेरिया ने संचालन करते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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