सच्ची सेवा शब्दों से नहीं, कर्मों से प्रकट होती है : प्रशांत अग्रवाल
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवातीर्थ स्थित वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा एवं अपनों से अपनी बात कार्यक्रम में शारदीय नवरात्र के छठे दिन देवी कात्यायनी की आराधना के साथ सती बेहुला और सुकन्या के प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया गया। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने इन प्रसंगों के माध्यम से सेवा, समर्पण, धैर्य और करुणा का संदेश देते हुए जरूरतमंदों की सहायता को सच्ची भक्ति का स्वरूप बताया।
अग्रवाल ने सती बेहुला के प्रसंग में बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी अटूट विश्वास और दृढ़ संकल्प व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं। पति लखिंदर के निधन के बाद बेहुला ने निराशा के आगे हार नहीं मानी। उनके जीवन की रक्षा की आशा में छह महीने तक नाव से यात्रा की। उसकी निष्ठा, धैर्य और समर्पण ने असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति अहंकार से नहीं, बल्कि विनम्रता, विश्वास और दूसरों के प्रति सम्मान से पूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि आज भी अनेक महिलाएं अपने दिव्यांग बच्चों, बीमार जीवन साथियों और जरूरतमंद परिजनों की वर्षों तक निस्वार्थ सेवा करती हैं। उनका समर्पण समाज के लिए प्रेरणा है। ऐसे सेवाभावी लोगों को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सहयोग, सम्मान और संबल देने की आवश्यकता है।
राजा शर्याति की पुत्री सुकन्या और महर्षि च्यवन के प्रसंग के माध्यम से अग्रवाल ने जिम्मेदारी स्वीकार करने और सेवा के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि सुकन्या ने अपनी भूल स्वीकार कर अपने दायित्व का निर्वहन किया। सच्ची सेवा केवल कहने से नहीं, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारने से सिद्ध होती है। किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके बाहरी रूप से नहीं, बल्कि उसके गुणों, भावनाओं और व्यक्तित्व से होना चाहिए।
अग्रवाल ने श्रद्धालुओं से दृष्टिबाधित व्यक्तियों एवं अन्य दिव्यांगजनों की सहायता करने, जरूरतमंदों को उपचार उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देने का आह्वान किया। कथा में सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
