करीब एक माह पीआईसीयू में रहा भर्ती, 22 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद पूर्ण स्वस्थ होकर हुआ डिस्चार्ज
उदयपुर। पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ), उदयपुर के चिकित्सकों ने गंभीर टिटनेस से पीड़ित 15 वर्षीय बच्चे का सफल उपचार कर उसे नया जीवन दिया है। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे बच्चे को लगभग एक माह तक पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू ) में भर्ती रखना पड़ा, जिसमें करीब 22 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता रही। लंबे और जटिल उपचार के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हुआ और उसे बिना किसी महत्वपूर्ण बीमारी संबंधी दुष्प्रभाव या जटिलता के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बच्चे का उपचार बाल रोग विभाग की टीम ने डॉ. विवेक पराशर के नेतृत्व में किया। इस टीम में डॉ. राहुल खत्री, डॉ. मनोज जोशी, डॉ. स्वामी, डॉ. जया एवं रेजीडेंट निज़ाम शामिल रहे। गंभीर स्थिति के दौरान बहुविषयक उपचार की आवश्यकता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अमित जांगिड़ तथा ईएनटी विभाग के डॉ. विक्रम राठौड़ ने भी उपचार में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
टिटनेस एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो Clostridium tetani नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न विष के कारण होती है। यह जीवाणु सामान्यतः मिट्टी, धूल तथा पशुओं के मल में पाया जा सकता है और कटने, छिलने, गहरे घाव या दूषित वस्तु से लगी चोट के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। बीमारी में शरीर की मांसपेशियों में अत्यधिक अकड़न और दर्दनाक ऐंठन हो सकती है। गंभीर मामलों में सांस लेने वाली मांसपेशियां भी प्रभावित हो सकती हैं, जिसके कारण मरीज को लंबे समय तक वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ सकती है।
इस बच्चे की स्थिति भी गंभीर थी और उसे लगातार गहन निगरानी, वेंटिलेटर सपोर्ट तथा विशेष चिकित्सा की आवश्यकता रही। पीआईसीयू की टीम द्वारा दिन-रात की गई निगरानी और विभिन्न विभागों के चिकित्सकों के समन्वित प्रयासों से बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। बाद में उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया और स्वास्थ्य में लगातार सुधार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई।
टीकाकरण से टिटनेस की रोकथाम संभव :
चिकित्सकों के अनुसार टिटनेस एक टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। इससे बचाव के लिए बच्चों का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार समय पर टीकाकरण तथा निर्धारित आयु पर बूस्टर डोज लगवाना बेहद जरूरी है। वयस्कों को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टिटनेस से बचाव के लिए बूस्टर टीका लगवाना चाहिए।
चोट लगने पर घाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना, मिट्टी या अन्य गंदगी हटाना और आवश्यकता पड़ने पर शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। केवल घाव पर घरेलू उपचार करना या लक्षण आने का इंतजार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
टिटनेस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता, लेकिन संक्रमण होने के बाद यह अत्यंत गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए समय पर टीकाकरण और चोट के बाद उचित घाव देखभाल ही इसकी रोकथाम के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
चेयरमैन श्री आशिश अग्रवाल एवं पीआईएमएस के चिकित्सकों ने कहा कि इस बच्चे की सफल रिकवरी समय पर उपचार, आधुनिक पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर, लंबे समय तक सुरक्षित वेंटिलेटर प्रबंधन और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के बेहतर समन्वय का परिणाम है। करीब 22 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद बच्चे का पूर्ण स्वस्थ होकर घर लौटना चिकित्सा टीम और परिवार दोनों के लिए सुखद उपलब्धि रही।
