नवलखा महल देश की स्वतंत्रता के बलिदानियों का केन्द्र : राजीव गुलाटी

उदयपुर। नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र देश के स्वतन्त्रता आन्दोलन के लिए अपनी प्राणों की आहूति देने वाले बलिदानियों का केन्द्र बन गया है। ये विचार एम.डी.एच.ग्रुप के चेयरमेन राजीव गुलाटी ने व्यक्त किए। वे आज गुलाब बाग स्थित नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र के नवप्रकल्प राष्ट्र मंदिर के लोकार्पण समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज मुझे अत्यन्त गर्व की अनुभूति हो रही है कि नवलखा महल जो कि महर्षि दयानन्द की कर्मभूमि रही है तथा वह पवित्र स्थल है जहां युग प्रवर्तक, महान समाज सुधारक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अपनी कालजयी कृति सत्यार्थ प्रकाश की रचना की थी। यह पवित्र स्थल आर्य समाज को प्राप्त होने के पूर्व राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग का शराब का गोदाम था जिसे आर्य समाज को प्राप्त होने के बाद यहां विभिन्न प्रकल्प स्थापित किए गए और इसे आर्य समाज के तीर्थ केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया।


उन्होंने कहा कि यहां देश की स्वतंत्रता के लिए ऐसे सपूत वीर जिन्होंने अपने प्राणों की आहूति दी परन्तु उनका इतिहास में नाम विलुप्त हैं उनके कार्याें को प्रदर्शित करने तथा उन वीर सपूतों का नाम जन-जन तक पहुंचाने के लिए यहां पर राष्ट्र उन्नायक वीथिका का निर्माण किया गया है। इसी क्रम में महर्षि दयानंद के मानस पुत्र जिन वीर बलिदानियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने आप को आहूत कर दिया उनके सिलिकोन स्टैचू से युक्त अति उच्च कोटि के एक म्यूजियम का निर्माण यहां किया गया है तथा उसे राष्ट्र मंदिर के रूप में स्थापित किया गया है,उसका लोकार्पण कर मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है। महर्षि दयानन्द सरस्वती का देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण स्थान है। स्वतन्त्रता सैनानी लाला लाजपत राय का देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान था वे महर्षि दयानन्द के अनन्य भक्त थे तथा उनकी प्रेरणा से देश की स्वतत्रंता आन्दोलन का उन्होंने एक नई दिशा मिली।
राजीव गुलाटी ने बताया कि मेरे पिता स्मृति शेष पूज्य महाशय धर्मपालजी गुलाटी श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष थे तथा उन्होंने यहां पर माता लीलावन्ती सभागार का निर्माण करवाया उनकी प्रेरणा, आशीर्वाद और उनके कार्याें को निरन्तरता प्रदान करने हेतु एम.डी.एच. की ओर से राष्ट्र मंदिर का निर्माण करवाया गया। नवलखा महल सांस्कृतिक केन्द्र और यहां की गतिविधियां देश ही नहीं वरन् अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आज अपनी पहचान बना चुकी है। मैं इसके लिए यहां के अध्यक्ष अशोक आर्य एवं उनकी टीम को बधाई सम्प्रेषित करता हूं और आशा करता हूं कि यहां के प्रकल्पों से युवा पीढ़ी प्रेरणा प्राप्त करेंगी।
समारोह में शहर विधायक ताराचन्द जैन ने कहा कि नवलखा महल को राजस्थान राज्य की पर्यटन स्थल की सूची में शामिल किया गया है। यहां देश विदेश से पर्यटक आकर वैदिक शिक्षाओं को अंगीकार करते हैं। नवलखा महल तथा यहां के प्रकल्पों से नवाचारों को संस्कार मिलते हैं। यहां के विकास के लिए मेरा हमेशा मेरा सहयोग रहेगा। नवलखा महल तथा यहां की गतिविधियां राष्ट्र प्रेम, परिवारों में संस्कार तथा सामाजिक व शैक्षिक उन्नति के लिए सहायक है।
मावली के पूर्व विधायक व वरिष्ठ नेता धर्मनारायण जोशी ने कहा कि मैं नवलखा महल व श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास तथा इसके संस्थापक अध्यक्ष स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती से शुरू से ही जुड़ा हुआ हूं। नवलखा महल को विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से यहां के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक आर्य ने नई दिशा दी है तथा यहां की गतिविधियां प्रेरणा का स्रोत है। महर्षि दयानन्द सरस्वती की इस पुण्य धरा पर आकर हमें आनन्द की अनुभूति होती है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व सामाजिक कार्यकर्ता विजय प्रकाश विप्लवी ने कहा कि इस स्थल पर देश की विभिन्न हस्तियांें तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, केन्द्रीय मंत्री अर्जुनलाल मेघवाल, पंजाब के राज्यपाल महामहिम गुलाबचन्द कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवानानी, वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा व राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों देश विदेश के गणमान्य लोगों का आगमन हुआ है तथा यहां की गतिविधियों की सभी ने भूरि भूरि प्रशंसा की है। मैं यहां के सतत विकास की कामना करता हूं।
यज्ञ भजन व प्रवचन-सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव के अंतर्गत सर्वप्रथम यज्ञ किया गया। यज्ञ इन्द्रप्रकाश व नवनीत आर्य के पुरोहित्य में सम्पन्न हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा सार्वदेशिक आर्यवीर दल के अधिष्ठाता पूज्य स्वामी देवव्रत थे। उन्होंने यज्ञ के महत्व पर पर प्रकाश डाला तथा इन्द्रदेव पीयूष ने हारमोनियम पर यज्ञ की महत्ता से संबंधित भजन प्रस्तुत किए।
सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव का आगाज ध्वजारोहण के साथ किया गया। ध्वजारोहण पूज्य स्वामी प्रणवानन्द एवं पूज्य स्वामी देवव्रत ने किया। इस अवसर पर ध्वजगीत इन्द्र देव ने प्रस्तुत किया तथा मां शारदा समूह द्वारा करतब व प्रदर्शन किया गया।

प्रारम्भ में राजीव गुलाटी, श्रीमती ज्योति गुलाटी, सुश्री हिरण्या गुलाटी, सुश्री वानिया गुलाटी व उनकी टीम का नवलखा महल द्वार पर तिलक, मेवाड़ी पगड़ी, पुष्प वर्षा, ओ3म् दुपट्टा आदि ओढ़ाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष अशोक आर्य, संयुक्त मंत्री डॉ. अमृतलाल तापड़िया, कोषाध्यक्ष नारायण लाल मित्तल, न्यासी श्रीमती शारदा गुप्ता, न्यासी बलराम चौहान, डॉ.एस.के.माहेश्वरी, श्रीमती ललिता मेहरा, मोतीलाल आर्य, श्रीमती सरला गुप्ता, विनोद राठौड़, कार्यालय मंत्री, भंवरलाल गर्ग, श्रीमती आभा आर्य, एनएमसीसी यूथ क्लब की संयोजक एडवोकेट श्रीमती ऋचा पीयूष, सुश्री उषा चौहान, श्रीमती भाग्यश्री, डॉ.प्रशान्त अग्रवाल, डॉ.प्रिया अग्रवाल, श्रीमती शुचिता अग्रवाल, सुश्री अस्मि अग्रवाल, जयेश आर्य, रवीन्द्र राठौड़, सिद्धम गोरमात, एम.एच.सी.सी. संयोजक श्रीमती दुर्गा गोरमात, गौरव, कपिल सोनी, हेमेन्द्र चौहान, मोहित चौहान, मांगीलाल, संदीप, सुश्री आनवी, सुश्री सूर्यांशी, कालूलाल, श्रीमती निरमा प्रवीण आर्य, दिव्येश सुथार, सुश्री करिश्मा शर्मा, रमेश पालीवाल, चन्द्रशेखर, शोभित मित्तल, भास्कर मित्तल, श्रीमती शीतल गुप्ता ने अतिथियांे का स्वागत किया।
इस अवसर पर राजीव गुलाटी का अभिनन्दन समारोह आयोजित किया गया। अध्यक्षता राजस्थान के पूर्व लोकायुक्त न्यायमूर्ति सज्जन सिंह कोठारी ने की । इस न्यायमूर्ति सज्जन सिंह कोठारी ने कहा कि राजीव गुलाटी ने नवलखा महल में नव प्रकल्प राष्ट्र मंदिर का निर्माण करवाया है। इनकी पत्नी श्रीमती ज्योति गुलाटी व इनकी पुत्रियां सुश्री हिरण्या व सुश्री वानिया गुलाटी भी स्मृति शेष पूज्य महाशय धर्मपाल गुलाटी का अनुसरण कर रही हैं। कार्यक्रम का संयोजन श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने किया।
श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य ने बताया कि जब नवलखा महल आर्य समाज को प्राप्त हुआ तो पूर्ण रूप से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। सर्वप्रथम दान की आहूति न्यास के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने एक करोड़ रु. देकर की। इसके पश्चात् सत्यनारायण लाहोटी ने यज्ञशाला हेतु समय समय पर दान दिया। इसके अतिरिक्त अमेरिका के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.सुखदेव चन्द सोनी, हरि वाष्णेय, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्मृति शेष सुरेश चन्द्र आर्य, दीनदयाल गुप्त, बाबू मिठाई लाल सिंह, स्मृतिशेष धर्मपाल गुलाटी, सज्जन सिंह कोठारी, सेठ लालचन्द मित्तल, एस.के. आर्य जैसे दानवीरों ने दान देकर न्यास में कई प्रकल्प स्थापित किए। इसके लिए मैं आभार प्रकाशित करता हूं।
डॉ. अमृतलाल तापड़िया ने कहा कि लोकार्पण कार्यक्रम तथा सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव में करीब दस हजार आगन्तुकों की भागीदारी रही है। इस समारोह में बाहर से आये आगन्तुकों के लिए आवास, भोजन, अल्पाहार इत्यादि की निःशुल्क व्यवस्था एम.डी.एच.ग्रुप की ओर से की गई है। आगन्तुकों की सुविधा हेतु गुलाब बाग में चल शौचालय की व्यवस्था भी की गई है।
भवानीदास आर्य ने बताया कि श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास की ओर से लोकार्पण व सत्यार्थ प्रकाश महोत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग एक वर्ष से तैयारियां की गई हैं। इसके लिए विभिन्न समितियां गठित की गई। समारोह को सफल बनाने हेतु सभी टीमों ने अथक प्रयास किया जिसके कारण यह कार्यक्रम सफल रूप से संचालित हो सका। कार्यक्रम का संयोजन सत्यप्रिय शास्त्री ने किया।
श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के न्यासी मंडल की बैठक –
श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के न्यासी मंडल की बैठक न्यास के सभागार में न्यास के संरक्षक राजीव गुलाटी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें विगत वर्ष के दौरान किए गए कार्याें का अनुमोदन तथा आगामी वर्षाें में किए जाने वाले कार्याें की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में संरक्षक स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती, श्रीमती शारदा गुप्ता, अध्यक्ष अशोक आर्य, संयुक्त मंत्री डा.अमृतलाल तापडिया, मंत्री भवानी दास आर्य, डॉ.एस.के. माहेश्वरी, श्रीमती शारदा गुप्ता, बलराम चौहान, मोतीलाल आर्य एवं न्यासीगण उपस्थित थे।
मोटरसाइकिल रैली निकाली –
महाशय धर्मपाल जी गुलाटी के उदयपुर आगमन पर उनकी अगुवानी व स्वागत में प्रतापनगर से वाया सेवाश्रम, सूरजपोल होते हुए गुलाब बाग तक 50 मोटरसाइकिल सवारों की रैली दिव्येश सुथार के संयोजन में निकाली गई।

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