720 और 915 ग्राम वजन के साथ जन्मे शिशुओं का दो महीने चला संघर्ष, लाखों का इलाज मुफ्त में हुआ
उदयपुर। पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पिम्स ) में तीन अत्यंत कम वजन वाले नवजात शिशुओं ने जिंदगी की जंग जीत ली है। जन्म के समय इनका वजन क्रमशः 720 ग्राम, 840 ग्राम और 915 ग्राम था — सामान्य नवजात के वजन का लगभग एक-चौथाई। करीब 45 से 60 दिनों तक गहन देखभाल के बाद तीनों अब स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी लेकर घर जा चुके हैं।
तीनों बच्चों का इलाज डॉ. विवेक पाराशर की देखरेख में हुआ, जिनकी टीम में डॉ. राहुल खत्री और डॉ. मनोज जोशी शामिल थे। इतने कम वजन और समय-पूर्व जन्मे बच्चों में सांस लेने की तकलीफ, संक्रमण, आंतों की समस्या और मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। शरीर का तापमान बनाए रखना और सुरक्षित तरीके से वजन बढ़ाना भी बड़ी चुनौती थी। इलाज के दौरान बच्चों की सांस, हृदय गति, तापमान, दूध पीने की क्षमता और वजन — हर पहलू पर लगातार नजर रखी गई। डॉ. पाराशर ने कहा कि ऐसे नवजातों की देखभाल में हर दिन कीमती होता है, और सही समय पर इलाज व टीम के समन्वित प्रयास से रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।
चेयरमैन ने की टीम की सराहना :
पिम्स के चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने पूरी मेडिकल और नर्सिंग टीम की मेहनत को इस सफलता का श्रेय दिया और उनके समर्पण की सराहना की।
लाखों का इलाज, एक रुपया भी नहीं लिया :
एडवांस एनआईसीयू सपोर्ट, विशेष दवाइयों और करीब दो महीने के अस्पताल प्रवास वाले इस इलाज पर सामान्यतः लाखों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन पिम्स ने तीनों बच्चों का पूरा उपचार निःशुल्क किया, जिससे परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली। तीनों नवजात अब स्वस्थ होकर अपने माता-पिता के साथ अस्पताल से छुट्टी लेकर घर जा चुके हैं। डॉक्टरों ने नियमित फॉलो-अप की सलाह दी है। महज 720, 840 और 915 ग्राम वजन से जीवन शुरू करने वाले इन तीन बच्चों की कहानी आधुनिक चिकित्सा और परिवारों के धैर्य की मिसाल बन गई है।

