उदयपुर राजपरिवार की सदस्य विजयराज कुमारी का 83 वर्ष की उम्र में निधन

– अंतिम यात्रा में पहुंचे हजारों लोग

उदयपुर : उदयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य और महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी श्रीमती विजयराज कुमारी (83) का सोमवार देर रात निधन हो गया। श्रीमती विजयराज लंबे समय से बीमार थीं। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह 8 बजे उदयपुर के शंभू निवास पैलेस से शुरू हुई जो  शहर के प्रमुख क्षेत्रों से होते हुए महासतियाजी पहुंची। वहां राजपरिवार की परंपरानुसार उनका  अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर पुत्र डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, पौत्र हरितराज सिंह मेवाड़ के अलावा विभिन्न राज परिवारों के सदस्य, शहर के प्रबुद्धजनों सहित हजारों शहरवासी उपस्थित थे।    

गौरतलब है कि कच्छ के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती विजयराज कुमारी मेवाड़, महाराज फतेहसिंह कच्छ की कनिष्ठ सुपुत्री तथा कच्छ के महाराव साहब की सुपौत्री थीं। उन्होंने ऊटी के फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट में प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्होंने अनुशासन और शिक्षा के महत्व को समझा। 1960 के दशक में उन्हें यूरोप और अमेरिका की यात्रा करने का अवसर मिला, जहाँ उन्होंने सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को निकट से देखा। इन अनुभवों ने उनके भारतीय मूल्यों और आध्यात्मिकता में उनके विश्वास को और अधिक दृढ़ किया।
महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ से विवाह के पश्चात वे उदयपुर में आ गई और आत्मिक उन्नति व व्यक्तिगत विकास की अपनी खोज को जारी रखा। विभिन्न सार्वजनिक और निजी धर्मार्थ ट्रस्टों से जुड़ी रहकर कार्य किये। विशेष रूप से श्री एकलिंगजी ट्रस्ट, जो मेवाड़ के प्राचीन मन्दिरों के संरक्षण और विकास में कार्यरत है। ट्रस्टों की प्रगति में उन्होंने सदैव अपना विशेष सहयोग और समर्थन दिया है। राजकीय उत्सवों में उनकी गरिमामयी उपस्थिति लोगों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का स्रोत बने रहे हैं।
1980 के दशक में श्रीमती विजयराज कुमारी मेवाड़ ने महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय ने पेशेवर दृष्टिकोण और शैक्षिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। शिक्षा और समाज पर उसके सकारात्मक प्रभाव सदैव उनके हृदय के निकट रहे हैं और उन्होंने इसे सदैव प्रोत्साहित किया है। वे प्रसिद्ध बिहार स्कूल ऑफ योग की समर्पित अनुयायी रही और इस संस्थान एवं इसके विद्वान गुरुओं की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया । इसके अतिरिक्त, वे हिस्टोरिकल रिसॉर्ट्स होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की संयुक्त प्रबंध निदेशक भी रही। उन्होंने बच्चों को न केवल उदार शिक्षा और आध्यात्मिक दृष्टिकोण की सीख दी, बल्कि परिवार की विशिष्ट परम्पराओं और जिम्मेदारियों को निभाने की शक्ति भी सुनिश्चित की है। श्रीमती विजयराज कुमारी मेवाड़ का जीवन समाज, शिक्षा, आध्यात्मिक और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनके कार्य और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।