गीतांजलि हॉस्पिटल में पैंक्रियाटाइटिस की जटिल सर्जरी, पैंक्रियास से निकालीं 10 से अधिक पथरियां

उदयपुर। गीतांजलि हॉस्पिटल में क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित मरीज की जटिल सर्जरी कर पैंक्रियास की मुख्य नली से 10 से अधिक पथरियां निकाली गईं। इनमें सबसे बड़ी पथरी का आकार डेढ़ सेंटीमीटर से अधिक था। गैस्ट्रो एवं पैंक्रियाटिक सर्जन डॉ. हेमंत जैन और उनकी टीम ने लैप्रोस्कोपिक-असिस्टेड लैटरल पैंक्रियाटिकोजेजुनोस्टॉमी (Puestow Procedure) के जरिए नली की रुकावट दूर कर पैंक्रियाटिक रस के प्रवाह को बेहतर बनाने की प्रक्रिया की।

मरीज लंबे समय से क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस से ग्रसित था। पैंक्रियास में लगातार सूजन के कारण उसकी मुख्य नली में पथरियां बन गई थीं। उसे बार-बार पेट दर्द, भोजन पचाने में परेशानी और वजन कम होने जैसी समस्याएं थीं। बीमारी के कारण पैंक्रियास की इंसुलिन बनाने की क्षमता प्रभावित होने से उसे डायबिटीज भी हो गई थी।

सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी तेजी से हुई। ऑपरेशन के चौथे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और उसके लक्षणों में भी उल्लेखनीय सुधार महसूस हुआ।

डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि पैंक्रियास की सर्जरी एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेष सर्जिकल कौशल और अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है। गीतांजलि हॉस्पिटल में इस प्रकार की उन्नत पैंक्रियाटिक सर्जरी की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि लंबे समय से पैंक्रियास की सूजन, मुख्य नली में पथरियों और लगातार दर्द से परेशान चुनिंदा मरीजों में उचित जांच के बाद सर्जरी प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है। इससे नली की रुकावट दूर करने और दर्द में लंबे समय तक राहत पाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बार-बार पेट दर्द, बिना कारण वजन कम होने या लगातार पाचन संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।