हर व्यक्ति और परिस्थिति से सीखने की ललक जरूरी : प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान में शनिवार को ‘अपनों से अपनी बात’ समारोह संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में हुआ। इसमें उपचारित दिव्यांगजन, मोबाइल, कंप्यूटर एवं सिलाई प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षणार्थियों सहित देशभर से उपचार के लिए आए रोगी और उनके परिजन शामिल हुए।

प्रशांत अग्रवाल ने गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रकाश डालते हुए भगवान कृष्ण-महर्षि सांदीपनि और रामकृष्ण परमहंस-स्वामी विवेकानंद के गुरु-शिष्य संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। वहीं शिष्य का धर्म है कि वह गुरु से मिले ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन को अपने आचरण में उतारे।

उन्होंने कहा कि सीखने की ललक हो तो व्यक्ति हर किसी से, हर परिस्थिति से और यहां तक कि पशु-पक्षियों से भी कुछ न कुछ सीख सकता है। भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरुओं से शिक्षा ग्रहण की थी। प्रकृति और जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं में भी सीखने के अवसर छिपे होते हैं। जरूरत केवल उन्हें देखने और समझने की है।

अग्रवाल ने गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि ‘कर्म किए जा, फल की इच्छा मत कर’—यह भाव प्रत्येक शिष्य को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। कर्तव्य और लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहकर निरंतर कर्म करते रहना ही सफलता का आधार है।

कार्यक्रम के दौरान अग्रवाल ने प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनके अनुभव, प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को निरंतर सीखते रहने, अपने हुनर को निखारने और उसे समाजोपयोगी बनाने के लिए प्रेरित किया।