वृंदावन-सा रंगा परिसर, दही हांडी के संग गूंजा गुरु वंदन

गीत-नृत्य और रंग-बिरंगी वेशभूषा ने बांधा समां
उदयपुर।
कहीं कान्हा की शरारतों का रंग था, कहीं राधा की भाव-भंगिमा की छटा और कहीं ऊंचाई पर बंधी मटकी को फोड़ने के लिए युवाओं के उत्साह की गूंज। चित्रकूट नगर स्थित पेसिफिक कॉलेज का परिसर शनिवार को उस समय उल्लास, संस्कृति और उमंग के अनूठे संगम में बदल गया, जब जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में दही हांडी उत्सव के साथ शिक्षक दिवस भी उत्साहपूर्वक मनाया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत कृष्ण जन्मोत्सव की भाव-भूमि को जीवंत करते गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों से हुई। विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, राधा-कृष्ण की लीलाओं और ब्रज संस्कृति से जुड़े प्रसंगों को नृत्य और अभिनय के माध्यम से मंच पर उतारा। रंग-बिरंगे परिधानों और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को मानो कुछ देर के लिए वृंदावन के उत्सवी रंग में रंग दिया। आकर्षक वेशभूषा प्रतियोगिता भी समारोह का खास आकर्षण रही। कृष्ण, राधा और पारंपरिक भारतीय पात्रों के रूप में सजे प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति, भाव-भंगिमा और साज-सज्जा से दर्शकों का ध्यान खींचा। हर प्रस्तुति में रचनात्मकता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की अलग झलक दिखाई दी।
संघ चेयरपर्सन आशीष अग्रवाल ने बताया कि उत्सव का सबसे रोमांचक पल मटकी फोड़ स्पर्धा रही। जैसे ही दही हांडी तक पहुंचने की चुनौती शुरू हुई, विद्यार्थियों के उत्साह ने पूरे परिसर को तालियों, हौसला अफजाई और जयघोष से भर दिया। टीम भावना, संतुलन और साहस के साथ प्रतिभागियों ने मटकी तक पहुंचने का प्रयास किया और इस पारंपरिक आयोजन को जीवंत बना दिया। इसी उल्लास के बीच शिक्षक दिवस ने आयोजन को भावनात्मक गरिमा भी दी। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन को जीवन निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति बताया।
पेसिफिक कॉलेज प्रिंसिपल डॉ रिमझिम गुप्ता ने बताया कि इस खास मौके पर बेस्ट ड्रेस (मेल) में रेहान, शाफिल और जैद तथा फीमेल में अक्षरा, नियति सिया और साहिबा के साथ बेस्ट डांस (सोलो) में आयशा, ग्रुप डांस में आयशा रेहान तथा सिया- लक्षिता ने बाजी मारी। समारोह के समापन पर गीत-नृत्य, वेशभूषा और मटकी फोड़ सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। पेसिफिक कॉलेज का यह आयोजन उत्सव, परंपरा, प्रतिभा और गुरु सम्मान का यादगार संगम बन गया।