’कैंसर की गांठ ने रोका खाना, रोबोटिक सर्जरी से लौटी जिंदगी’

उदयपुर। वल्लभनगर निवासी 59 वर्षीय मांगीबाई मेनारिया पिछले कुछ समय से खाना निगलने में परेशानी से जूझ रही थीं। धीरे-धीरे उनकी यह समस्या बढ़ती गई और भोजन करना भी कठिन हो गया। जीबीएच कैंसर हॉस्पिटल में पहली बार भोजन नली के कैंसर का रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेषन कर जान बचाई गई।
मांगीबाई मेनारिया की इस समस्या पर सबसे पहले परिवार ने स्थानीय स्तर पर चिकित्सकीय परामर्श लिया, जिसकी जांच में भोजन नली (Oesophagous) में गांठ होने की जानकारी सामने आई। परिजन उन्हें जीबीएच जनरल एवं कैंसर हॉस्पिटल, बेडवास लेकर पहुंचे। यहां विशेषज्ञों ने एंडोस्कोपी, पीईटी-सीटी सहित आवश्यक जांचों के बाद भोजन नली में मौजूद गांठ के कैंसरग्रस्त होने की पुष्टि हुई। मरीज ने कैंसर सर्जन डॉ. शैलेष पाटीदार से परामर्श लिया। उपचार की शुरुआत रेडिएशन के साथ की गई। चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद कैंसर की गांठ को हटाने के लिए रोबोटिक सर्जरी का निर्णय लिया गया।
’उदयपुर में पहली बार भोजन की नली के कैंसर की रोबोटिक सर्जरी’
विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन नली में कैंसर की गांठ की रोबोटिक सर्जरी उदयपुर में पहली बार की गई। मरीज की सर्जरी एक जटिल और अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से हुई और भोजन नली में मौजूद कैंसर की गांठ को पूरी तरह हटा दिया गया। इस ऑपरेशन में कैंसरग्रस्त भोजन नली के हिस्से को हटाने के साथ-साथ पेट से नई भोजन नली (कंड्यूट) तैयार कर उसे ऊपर लाकर शेष भोजन नली से जोड़ा गया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। इस पूरी जटिल प्रक्रिया को रोबोटिक तकनीक की सहायता से किया गया, जिसमें अत्यंत छोटे चीरे, हाई-डेफिनिशन 3 डी विजन और रोबोटिक उपकरणों की सूक्ष्म एवं सटीक मूवमेंट का उपयोग किया गया। ’सर्जरी का नेतृत्व डॉ. शैलेष पाटीदार, (कैंसर सर्जन) और निश्चेतना विभाग से डॉ. रूपाली दास (एनेस्थेलियोलॉजिस्ट) ने किया।’ भोजन नली के कैंसर की सर्जरी को कैंसर सर्जरी की जटिल प्रक्रियाओं में माना जाता है, क्योंकि इसमें छाती और पेट दोनों हिस्सों में महत्वपूर्ण संरचनाओं के आसपास काम करना पड़ता है। इस मरीज में यह पूरी प्रक्रिया रोबोटिक तकनीक से सफलतापूर्वक पूरी की गई।
’सर्जरी के बाद तेजी से रिकवरी’ :
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। चिकित्सकीय निगरानी में उन्हें अगले ही दिन राईल्स ट्यूब से फीडिंग शुरू कराई गई और राइल्स ट्यूब भी प्रारंभिक अवधि में हटा दी गई। मरीज अब सामान्य रूप से भोजन कर पा रही हैं और अपनी दैनिक गतिविधियों की ओर लौट रही हैं। मरीज के परिजनों ने उपचार और सर्जरी के बाद हुए सुधार पर संतोष व्यक्त किया।
’अत्याधुनिक तकनीक से जटिल कैंसर सर्जरी को मिली नई दिशा’ :
डॉ. शैलेष पाटीदार ने बताया कि वमेवचींहवने कैंसर की सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। रोबोटिक सर्जरी में बेहतर oesophagous विजन, छोटे एवं अधिक सटीक उपकरणों की मूवमेंट और शरीर के कठिन स्थानों तक बेहतर पहुंच जैसे फायदे मिलते हैं। इससे जटिल ऑपरेशन को न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से करने में मदद मिलती है और कई मरीजों में पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी बेहतर हो सकती है। जीबीएच जनरल एवं कैंसर हॉस्पिटल में अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के माध्यम से जटिल कैंसर सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने से उदयपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही शहर में उन्नत कैंसर उपचार मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।