उदयपुर की आदिवासी महिला, जो बनीं सैकड़ों परिवारों का आत्मविश्वास”
उदयपुर। कहते हैं कि हालात चाहे जितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान अपनी तक़दीर खुद लिख सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है उदयपुर की केशरी मीना की, जिन्होंने जीवन में असंख्य दुख, अभाव और संघर्ष झेलने के बावजूद हार नहीं मानी और आज एक सफल “केसर होम मेड फ़ूड” टिफिन सेवा का संचालन कर रही हैं।
केशरी मीना का जीवन आसान नहीं रहा। बचपन में अपने भाई की मृत्यु के बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया था और पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसके बाद विवाह हुआ। उनके पति खनन (माइनिंग) के क्षेत्र में कार्य करते थे, लेकिन एक दुर्घटना में खेलते समय पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया, जिसके कारण वे मेडिकल रूप से अनफिट घोषित कर दिए गए। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई।
इन कठिन परिस्थितियों में भी केशरी मीना ने हार मानने के बजाय हिम्मत दिखाई। परिवार की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ली और घर से ही टिफिन सेवा शुरू की। आज “केसर होम मेड फ़ूड” उदयपुर के सेक्टर-5 क्षेत्र में छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दूर-दराज़ से आए लोगों के लिए घर जैसा शुद्ध भोजन उपलब्ध करा रहा है।
खास बात यह है कि सीमित पढ़ाई के बावजूद केशरी मीना ने दोबारा शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। आज वे बी.ए. फाइनल ईयर में अध्ययनरत हैं और साथ ही ANM (नर्सिंग) का कोर्स भी कर रही हैं। यह साबित करता है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। केशरी मीना न सिर्फ़ अपने परिवार को संभाल रही हैं, बल्कि अपनी बेटी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराकर उसका भविष्य भी संवार रही हैं।
केसर होम मेड फ़ूड की पहचान शुद्धता, ईमानदारी और घर जैसे स्वाद से है। यहाँ मुनाफ़े से ज़्यादा ग्राहकों के स्वास्थ्य और संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाती है। यही कारण है कि आज उनका टिफिन सेंटर भरोसे का नाम बन चुका है। एक आदिवासी महिला के रूप में केशरी मीना आज समाज की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, अगर इंसान हिम्मत न हारे तो सफलता अवश्य मिलती है।
गरीबी, संघर्ष और हिम्मत की मिसाल बनीं केशरी मीना
